Bihar News : बांका में विकास या 'बंदरबांट'? तीन नगर पंचायतों में करोड़ों के घोटाले की आहट, राजस्थान कनेक्शन पर उठे सवाल

Bihar News : बांका के तीन नगर पंचायतों में करोड़ों की घोटाले की आहट देखने को मिल रही है. इसका राजस्थान कनेक्शन भी सामने आ रहा है.......पढ़िए आगे

Bihar News : बांका में विकास या 'बंदरबांट'? तीन नगर पंचायतों
घोटाले की आहट - फोटो : CHANDRASHEKHAR

BANKA : जिले की तीन प्रमुख नगर पंचायतों—अमरपुर, कटोरिया और बौसी में इन दिनों विकास की चमक से कहीं ज्यादा भ्रष्टाचार के आरोपों की गूंज सुनाई दे रही है। हाई मास्ट लाइट, बस स्टॉप शेल्टर और वाटर एटीएम जैसी योजनाओं में भारी अनियमितता और सरकारी धन के बंदरबांट के गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का दावा है कि सौंदर्यीकरण के नाम पर नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों रुपये का 'खेल' किया गया है।

नियमों की अनदेखी और 'राजस्थान कनेक्शन' का रहस्य

नगर विकास विभाग के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी प्रोजेक्ट का प्राक्कलन (Estimate) भवन निर्माण विभाग के SOR के आधार पर बने और ई-टेंडरिंग अनिवार्य हो। लेकिन आरोप है कि इन तीनों नगर पंचायतों में नियमों को दरकिनार कर मनमाने तरीके से टेंडर आवंटित किए गए। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि अधिकांश बड़े टेंडर राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के संवेदकों को दिए गए हैं। स्थानीय ठेकेदारों की अनदेखी और बाहरी जिले के चुनिंदा संवेदकों पर इस 'मेहरबानी' ने पारदर्शी चयन प्रक्रिया पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे राज्य को GST राजस्व का भी नुकसान होने की आशंका है।

7-8 गुना महंगी खरीदारी: GeM पोर्टल और धरातल की कीमतों में भारी अंतर

भ्रष्टाचार के आरोप तब और पुख्ता नजर आते हैं जब सामग्री की कीमतों की तुलना की जाती है। सूत्रों का दावा है कि जो उपकरण या लाइट GeM पोर्टल पर लगभग ₹4,000 में उपलब्ध हैं, उनकी खरीदारी नगर पंचायतों द्वारा 7 से 8 गुना अधिक कीमतों पर की गई है। यदि तकनीकी जांच होती है, तो यह मामला करोड़ों रुपये के बड़े घोटाले के रूप में सामने आ सकता है। उपकरणों की गुणवत्ता और उनकी वास्तविक बाजार दर के बीच का यह भारी अंतर सीधे तौर पर कमीशनखोरी की ओर इशारा कर रहा है।

बिना जरूरत के निर्माण: जहां यात्री नहीं, वहां बस स्टॉप और वाटर एटीएम

योजनाओं के क्रियान्वयन में 'स्थल चयन' भी संदेह के घेरे में है। जिले में जहाँ एक भी व्यवस्थित बस स्टैंड नहीं है, वहां सात अलग-अलग स्थानों पर भव्य बस स्टॉप शेल्टर बना दिए गए हैं, जिनमें से कई ऐसे सुनसान इलाकों में हैं जहां यात्रियों का आवागमन न के बराबर है। इसी तरह, अमरपुर में 8 करोड़ की लागत से बनी जल टंकियों और 'नल-जल योजना' की मौजूदगी के बावजूद, उन जगहों पर वाटर एटीएम लगाए जा रहे हैं जहाँ उनकी कोई उपयोगिता नहीं है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ये योजनाएं जनसुविधा के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ कागजी खानापूर्ति और मोटा कमीशन डकारने के लिए थोपी गई हैं।

अपनों को रेवड़ी: टेंडर प्रक्रिया में पक्षपात और रसूख का बोलबाला

स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर यह भी आरोप है कि सड़क और नाला निर्माण जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं मुख्य पार्षदों के करीबियों और रिश्तेदारों को बांटी जा रही हैं। सरकारी नियमों के अनुसार, कोई भी जनप्रतिनिधि अपने परिजनों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लाभ नहीं दे सकता, लेकिन बांका की इन नगर पंचायतों में इस नियम की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। रसूखदारों को लाभ पहुँचाने के चक्कर में उन वार्डों की अनदेखी की जा रही है जहाँ वास्तव में रोशनी और पानी की सख्त जरूरत है।

उच्च स्तरीय जांच की मांग: प्रशासन के पाले में गेंद

इन गंभीर आरोपों के बाद अब बांका प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि टेंडर प्रक्रिया की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए और सामग्री की कीमतों का बाजार दर से भौतिक सत्यापन (Physical Verification) हो। मांग यह भी है कि दोषी अधिकारियों और संलिप्त जनप्रतिनिधियों पर FIR दर्ज कर सरकारी धन की वसूली की जाए। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इन आरोपों पर 'क्लीन चिट' का पर्दा डालता है या निष्पक्ष जांच कर जनता की गाढ़ी कमाई का हिसाब लेता है। 

चन्द्रशेखर भगत की रिपोर्ट