Bihar News : बेगूसराय में प्रतिमा स्थापना पर गर्माया सियासी पारा, श्रीबाबू की प्रतिमा की मांग पर निकाला गया विशाल मशाल जुलूस

Bihar News : इन दिनों बेगूसराय में महापुरुषों के प्रतिमा लगाने मामले पर सियासी पारा हाई हो चूका है। इसी कड़ी में आज मशाल जुलूस का आयोजन किया गया......पढ़िए आगे

Bihar News : बेगूसराय में प्रतिमा स्थापना पर गर्माया सियासी
मशाल जुलूस का आयोजन - फोटो : AJAY

BEGUSARAI : बेगूसराय में महापुरुषों की प्रतिमा स्थापित करने को लेकर राजनीतिक और सामाजिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है। एक तरफ जहां बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री 'बिहार केसरी' डॉ. श्रीकृष्ण सिंह (श्रीबाबू) की प्रतिमा लगाने की मांग पर लोग अड़े हुए हैं, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रनायक दानवीर भामाशाह की प्रतिमा को लेकर राजनीति तेज हो गई है। इसी विरोध और मांग के बीच सैकड़ों समर्थकों ने शहर के स्वामी विवेकानंद ट्रैफिक चौक से एक विशाल मशाल जुलूस निकाला, जो शहर का भ्रमण करते हुए पुस्तकालय रोड पर जाकर समाप्त हुआ।  

श्रीबाबू के ऐतिहासिक योगदान को बताया सर्वोपरि

प्रदर्शन के दौरान पूर्व डिप्टी मेयर राजीव रंजन (राजीव पासवान) ने कहा कि बेगूसराय ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार में नमक सत्याग्रह और औद्योगिक विकास के माध्यम से श्रीबाबू ने जो अमूल्य योगदान दिया है, वह किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने कहा कि श्रीबाबू बेगूसराय की ऐतिहासिक विरासत और औद्योगिक पहचान के प्रमुख शिल्पकार रहे हैं।

अनावश्यक राजनीति पर जताया एतराज

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर दानवीर भामाशाह की प्रतिमा की आड़ में बेवजह की राजनीति कर रहे हैं और श्रीबाबू के योगदान को कमतर आंकने की कोशिश कर रहे हैं। नेताओं का कहना है कि महापुरुषों के नाम पर इस तरह की राजनीति कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी

जुलूस में शामिल वक्ताओं ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि मल्हीपुर सिक्सलेन गोलंबर पर बिहार केसरी श्री कृष्ण सिंह की प्रतिमा स्थापित नहीं की गई, तो इस जन-आंदोलन को और भी अधिक उग्र और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल एक प्रतिमा लगाने की नहीं, बल्कि बेगूसराय की ऐतिहासिक अस्मिता और विरासत को सम्मान दिलाने की है।  

राजनीतिक खींचतान से शहर में तनाव

उल्लेखनीय है कि इस मुद्दे पर अलग-अलग पक्ष अपनी मांगों पर डटे हुए हैं, जहां एक ओर भामाशाह की प्रतिमा की मांग को लेकर केंद्रीय मंत्री तक सिफारिश पत्र पहुंचे हैं, वहीं दूसरी ओर दलित समुदाय और स्थानीय प्रबुद्ध वर्ग के नेतृत्व में श्रीबाबू की 'स्टैचू ऑफ डेवलपमेंट' स्थापित करने का अभियान तेजी से जोर पकड़ रहा है।

अजय शास्त्री की रिपोर्ट