बेगूसराय वार्डन रिंकू कुमारी हत्याकांड: 5 साल बाद IPS विकास वैभव ने किया दूध का दूध और पानी का पानी, 2 आरोपी गिरफ्तार
4 अप्रैल 2021 को कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की वार्डन रिंकू कुमारी की मौत को पुलिस ने शुरुआत में 'आत्महत्या' बताकर केस बंद कर दिया था। लेकिन बेटियों की जिद और हाईकोर्ट के आदेश पर बनी IPS विकास वैभव की SIT ने 5 साल बाद दूध का दूध और पानी का पानी
बिहार के बेगूसराय जिले में स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में 4 अप्रैल 2021 पदस्थापित वार्डन रिंकू कुमारी का शव संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद हुआ था। उस समय शुरुआती पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह फांसी से दम घुटना (हैंगिंग) बताते हुए मामला आत्महत्या मानकर बंद कर दिया गया। हालांकि, मृतका की तीनों बेटियां पुलिस की इस थ्योरी को मानने को तैयार नहीं हुईं। उन्होंने लगातार यह दावा किया कि यह एक सोची-समझी हत्या थी और वे न्याय के लिए संघर्ष करती रहीं।
हाई कोर्ट का हस्तक्षेप, SIT का गठन और IPS विकास वैभव को कमान
5 साल तक थानों और अदालतों के चक्कर काटने के बाद जब यह मामला पटना हाई कोर्ट पहुंचा, तो अदालत ने शुरुआती जांच में कई गंभीर विसंगतियां पाईं। हाई कोर्ट ने मामले का 'डी-नोवो' (नए सिरे से) अनुसंधान करने और एसआईटी (SIT) गठित करने का सख्त आदेश दिया। इसके बाद मगध रेंज के आईजी (IPS) विकास वैभव की निगरानी में बेगूसराय के डीआईजी शैलेश कुमार सिन्हा और अन्य वरीय अधिकारियों को शामिल कर एक विशेष जांच टीम का गठन किया गया।

फॉरेंसिक रिपोर्ट और री-क्रिएशन से बेनकाब हुआ मर्डर का सच
13 जुलाई 2026 से जब एसआईटी ने नए सिरे से जांच शुरू की, तो पुलिस की पुरानी लापरवाही सामने आ गई। घटना के समय फॉरेंसिक टीम ने अपनी रिपोर्ट में मौत का कारण गला घोंटना (स्ट्रैंगुलेशन) बताया था, जिसे तत्कालीन जांच अधिकारी (IO) ने पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया था। एसआईटी ने क्राइम सीन री-क्रिएट किया, फॉरेंसिक टीम और डॉक्टरों से पूछताछ की तथा तकनीकी साक्ष्यों का मिलान किया। इससे यह साफ हो गया कि रिंकू कुमारी की पहले हत्या की गई और फिर शव को इस तरह रखा गया ताकि मामला आत्महत्या लगे।

₹15 लाख का लेन-देन बनी हत्या की वजह, 2 मुख्य आरोपी गिरफ्तार
एसआईटी की गहन जांच में हत्या के पीछे ₹15 लाख का आर्थिक विवाद उजागर हुआ। रिंकू कुमारी ने अपने गांव के कौशल कुमार को जमीन खरीदने के लिए ₹15 लाख दिए थे। जब न तो जमीन मिली और न ही रकम वापस हुई, तो रिंकू कुमारी ने दबाव बनाना शुरू कर दिया। इस पर आरोपी कौशल कुमार ने स्कूल के केयरटेकर सह गार्ड अजीत कुमार उर्फ बबलू के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची और वारदात को अंजाम दे दिया। एसआईटी ने दोनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
तत्कालीन IO की लापरवाही उजागर, बंद पाए गए थे सीसीटीवी कैमरे
जांच के दौरान आईजी विकास वैभव ने शुरुआती जांच करने वाले तत्कालीन जांच अधिकारी (IO) की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। पुलिसिया लापरवाही का आलम यह था कि फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की राय को दरकिनार कर केस को जल्दबाजी में बंद कर दिया गया था। इसके अलावा, घटना के वक्त स्कूल के सीसीटीवी कैमरे बंद पाए गए थे, लेकिन एसआईटी ने डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों के जरिए वारदात के समय आरोपियों की मौके पर मौजूदगी के पुख्ता सबूत हासिल कर लिए हैं।

बेटियों ने जताई खुशी, कहा– "5 साल के संघर्ष के बाद आखिरकार मिला न्याय"
5 सालों तक बिना थके न्याय की लड़ाई लड़ने वाली रिंकू कुमारी की बेटियों ने आरोपियों की गिरफ्तारी पर संतोष और खुशी जाहिर की है। बेटियों का कहना है कि उनकी मां बहुत ही प्रतिभावान और मजबूत महिला थीं, जो कभी आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठा सकती थीं। उन्होंने कहा कि 5 साल तक दर-दर भटकने के बाद आईपीएस विकास वैभव और एसआईटी की पारदर्शी जांच की बदौलत आज उनकी मां को सच्चा न्याय मिल सका है।