Bihar News : बेतिया में 'नरक' बना वृद्धाश्रम ! बुजुर्गों को बंधक बनाकर लाठी-डंडों से पिटाई, मुंह में कपड़ा ठूंसकर दी जाती थी यातनाएं, SDM की छापेमारी में हुआ बड़ा खुलासा
Bihar News : बेतिया में संचालित एक वृद्धाश्रम में बुजुर्गों को बंधक बनाकर पिटाई की जा रही थी. जिसके बाद SDM ने वहां छापेमारी की और कई बुजुर्गों का रेस्क्यू किया.......पढ़िए आगे
BETTIAH : पश्चिम चंपारण के बैरिया थाना क्षेत्र से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां सहारा वृद्ध आश्रम के नाम पर बुजुर्गों के साथ बर्बरता की जा रही थी। आरोप है कि महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, पटना जंक्शन और हनुमान मंदिर जैसे स्थानों से वृद्धजनों को जबरन उठाकर इस आश्रम में लाया जाता था और उन्हें उनकी मर्जी के खिलाफ बंधक बनाकर रखा जाता था। पीड़ितों की मानें तो यहां रहने वाले बुजुर्गों पर न सिर्फ मानसिक बल्कि शारीरिक अत्याचार भी किया जाता था। एक वृद्ध महिला ने दर्द बयां करते हुए बताई कि रात होते ही आश्रम के लोग उनके मुंह में कपड़ा ठूंस देते और फिर लाठी-डंडों से बेरहमी से पिटाई करते थे। इतना ही नहीं, जब कोई अपने घर लौटने की बात करता, तो उसे बंद कमरे में ले जाकर प्रताड़ित किया जाता था। कई बुजुर्गों को छपरा रेलवे स्टेशन जैसे स्थानों से जबरन उठाकर यहां लाने की बात भी सामने आई है।
हैरानी की बात यह है कि इस आश्रम की मान्यता पहले ही रद्द हो चुकी थी, इसके बावजूद यह अवैध रूप से संचालित हो रहा था और अंदर बुजुर्गों को कैद कर अमानवीय हालात में रखा जा रहा था। इस खुलासे के बाद बहेरिया स्थित सहारा विद्याश्रम में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए छापेमारी की। एसडीएम विकास कुमार के नेतृत्व में पहुंची टीम ने कई गंभीर अनियमितताओं का खुलासा किया।
जांच के दौरान पाया गया कि केंद्र में लोगों को जबरन रखा जा रहा था। रेस्क्यू किए गए लोगों ने बताया कि उन्हें मारपीट कर डराया जाता था और उनकी इच्छा के विरुद्ध यहां रखा गया था। कई लोगों ने यह भी बताया कि उन्हें पटना के महावीर मंदिर और विभिन्न रेलवे स्टेशनों से लाकर यहां रखा गया। छापेमारी के समय परिसर के अंदर और बाहर ताला बंद मिला, जिससे प्रशासन को संदेह और गहरा हुआ। रजिस्टर की जांच में भी कई गड़बड़ियां सामने आईं। पहले जहां 30-40 लोगों के रहने का उल्लेख था, वहीं मौके पर केवल 15 लोग ही मौजूद मिले।
इस संबंध मे एसडीएम बेतिया विकास कुमार ने बताया कि बिना किसी अधिकृत समिति की अनुमति के लोगों को “रिहैबिलिटेशन” के नाम पर रखा जा रहा था, जो नियमों का उल्लंघन है। वहीं, स्टाफ के जवाब भी संतोषजनक नहीं पाए गए। जांच में यह भी सामने आया कि बिजली की आपूर्ति अवैध तरीके से बायपास कर इस्तेमाल की जा रही थी। परिसर के मालिक ने भी किराया नहीं मिलने और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी दी। छापेमारी के दौरान लाठियां और डंडे भी बरामद किए गए, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर लोगों को पीटने में किया जाता था। कुछ लोगों के शरीर पर चोट के निशान भी पाए गए। मेडिकल जांच के दौरान बिना प्रिस्क्रिप्शन दवाइयों के इस्तेमाल की भी आशंका जताई गई। वहीं, एक युवती काजल कुमारी खुद को नर्स बता रही थी, लेकिन उसके पास कोई वैध डिग्री नहीं पाई गई। प्रशासन ने सभी 15 लोगों का बयान दर्ज कर उन्हें रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान “उमंग” केंद्र भेज दिया है। मामले में आगे की कार्रवाई जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य ठिकानों पर भी जांच की तैयारी की जा रही है।
आशीष की रिपोर्ट