Bihar News : विक्रमशिला सेतु का विकल्प बना जलमार्ग, तिनटंगा से कहलगांव के बीच चलेंगे 4 मालवाहक जहाज, शार्क शिपिंग कंपनी संभालेगी परिवहन का जिम्मा

Bihar News : विक्रमशिला सेतु संकट को लेकर अब गंगा के रास्ते माल ढुलाई की जाएगी. इसी कड़ी में तिनटंगा से कहलगांव के बीच चार बड़े मालवाहक जहाज चलाए जायेंगे......पढ़िए आगे

Bihar News : विक्रमशिला सेतु का विकल्प बना जलमार्ग, तिनटंगा
तिनटंगा से कहलगांव के बीच चलेंगे 4 मालवाहक जहाज- फोटो : BALMUKUND

BHAGALPUR : विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने से भागलपुर, नवगछिया और सीमांचल के जिलों के बीच टूटा सड़क संपर्क अब जलमार्ग के जरिए बहाल होने जा रहा है। जिला प्रशासन के निर्देश पर तिनटंगा करारी घाट से कहलगांव गंगा घाट तक चार बड़े मालवाहक जहाजों के संचालन की तैयारी अंतिम चरण में है। इस पहल से सेतु बंद होने के कारण ठप पड़ी माल ढुलाई व्यवस्था को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

मिली जानकारी के अनुसार, कोलकाता की शार्क शिपिंग कंपनी को इस संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कंपनी के चार मालवाहक जहाज झारखंड के साहेबगंज पहुँच चुके हैं, जो जल्द ही भागलपुर की सीमा में प्रवेश करेंगे। नवगछिया के तिनटंगा करारी गंगा घाट पर जहाजों के सुरक्षित परिचालन और लोडिंग-अनलोडिंग को लेकर प्रशासनिक रोडमैप तैयार कर लिया गया है।

इस महत्वपूर्ण परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए शार्क शिपिंग कंपनी के निदेशक मोहम्मद अरशद रजा और तनवीर हसन ने नवगछिया के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ तिनटंगा करारी घाट का भौतिक सत्यापन किया। अधिकारियों ने घाट की भौगोलिक स्थिति और जहाजों के आवागमन के लिए जलस्तर का बारीकी से मुआयना किया है, ताकि परिचालन में कोई तकनीकी बाधा न आए।

संभावना जताई जा रही है कि मंगलवार से तिनटंगा करारी घाट पर जहाज संचालन की प्रक्रिया और तैयारी धरातल पर दिखने लगेगी। इस वैकल्पिक व्यवस्था से न केवल भागलपुर और नवगछिया बल्कि पूरे सीमांचल के व्यापारियों को बड़ी सुविधा मिलेगी। ट्रकों और भारी वाहनों की आवाजाही शुरू होने से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुचारू हो सकेगी और व्यापारियों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकेगा। विक्रमशिला सेतु पर आवाजाही बंद होने के कारण पिछले कई दिनों से क्षेत्र की परिवहन व्यवस्था चरमरा गई थी। अब जलमार्ग के इस 'कॉरिडोर' के शुरू होने से सेतु पर पड़ने वाला दबाव कम होगा और लोगों को एक विश्वसनीय विकल्प मिल सकेगा। प्रशासन का पूरा ध्यान अब इस बात पर है कि जल्द से जल्द जहाजों का नियमित परिचालन शुरू कर दिया जाए।

बालमुकुन्द की रिपोर्ट