Bihar Politics: 61 हजार वाले.. बयान पर भड़कीं अर्पणा, चमचा वाले बयान पर मंत्री कुमार शैलेंद्र को जमकर सुना दिया
Bihar Politics: पथ निर्माण मंत्री कुमार शैलेंद्र के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन प्रत्याशी रहीं कुमारी अर्पणा को लेकर दिए गए कथित 61 हजार वाले बयान पर राजनीति शुरु हो गई है.....
Bhagalpur:बाढ़ की त्रासदी के बीच बिहपुर में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। पथ निर्माण मंत्री कुमार शैलेंद्र के विधानसभा चुनाव में 61 हजार वोट पाने वाली महागठबंधन प्रत्याशी रहीं कुमारी अर्पणा को लेकर दिए गए कथित ‘61 हजार वाले’ बयान पर उन्होंने पलटवार किया है। अर्पणा ने कहा कि चुनाव में हार-जीत लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन किसी प्रत्याशी को मिले वोटों की संख्या का मजाक बनाना उन मतदाताओं के फैसले पर सवाल खड़ा करता है, जिन्होंने अपना मत दिया है।
अर्पणा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भले ही ‘61 हजार’ कहकर तंज किया गया हो, लेकिन यह संख्या उनके लिए 61 हजार मतदाताओं के भरोसे का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि चुनाव में किसी को कम या ज्यादा वोट मिलना सामान्य बात है, लेकिन मतदाताओं की संख्या को लेकर कटाक्ष करना उचित नहीं है।उन्होंने कहा कि “हार-जीत चुनाव का हिस्सा है, लेकिन जिन 61 हजार लोगों ने मुझे वोट दिया, उनके फैसले का मजाक बनाना ठीक नहीं है।” अर्पणा ने इसे सिर्फ अपना नहीं, बल्कि उन सभी मतदाताओं के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया, जिन्होंने चुनाव में मतदान किया।
बिहपुर में बाढ़ की स्थिति का हवाला देते हुए अर्पणा ने कहा कि जब इलाके की जनता मुश्किल दौर से गुजर रही है और लोग राहत एवं मदद का इंतजार कर रहे हैं, तब राजनीतिक चर्चा का केंद्र यह नहीं होना चाहिए कि किसे कितने हजार वोट मिले। उनके मुताबिक, नेताओं को जनता की समस्याओं और बाढ़ से प्रभावित लोगों की परेशानियों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।
मंत्री के कथित ‘चमचा’ वाले बयान को लेकर भी अर्पणा ने निशाना साधा। सामने आए ऑडियो बयान में सांसद के सहयोगी कार्यकर्ताओं के लिए कथित तौर पर ‘चमचा’ शब्द इस्तेमाल किए जाने पर सवाल उठाए गए हैं। अर्पणा ने इसी संदर्भ में कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन जनप्रतिनिधियों के साथ काम करने वाले कार्यकर्ताओं के लिए इस तरह की भाषा राजनीतिक संवाद की मर्यादा पर सवाल खड़े करती है।
अर्पणा ने धार्मिक प्रतीक का उल्लेख करते हुए कहा कि राम सिर्फ गले में रुद्राक्ष धारण करने से नहीं, बल्कि जुबान और आचरण से दिखाई देते हैं। उन्होंने खुद को ‘बिहपुर की बेटी’ बताते हुए कहा कि जनता से जुड़े मुद्दों को वह आगे भी उठाती रहेंगी और किसी राजनीतिक बयान के दबाव में पीछे नहीं हटेंगी।
बिहपुर में मंत्री के बयान के बाद शुरू हुआ यह सियासी वार-पलटवार अब वोटों के सम्मान, राजनीतिक भाषा और बाढ़ के बीच जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकताओं तक पहुंच गया है। हालांकि, दोनों पक्षों के बयानों और सामने आए ऑडियो के संदर्भ में संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया ही पूरे मामले की स्थिति को स्पष्ट कर सकती है।