Sultanganj Firing Case: सुलतानगंज का चांद बुझा… गोलियों की गूंज में खत्म हुई राजकुमार गुड्डू की जिंदगी, 12 दिन तक मौत से लड़ते रहे मुख्य पार्षद, अब सदमे में पूरा शहर, पढ़िए अंजनी कश्यप की स्पेशल स्टोरी

Sultanganj Firing Case: 12 दिनों तक जिंदगी और मौत से जंग लड़ने के बाद मुख्य पार्षद राजकुमार गुड्डू ने पटना के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ले ली। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे सुलतानगंज में मातम पसर गया।...

Bhagalpur Chairman Rajkumar Guddu Dies After 12 Day Battle C
मुख्य पार्षद की मौत से गमगीन सुलतानगंज- फोटो : reporter

Sultanganj Firing Case:बिहार के सुलतानगंज नगर परिषद कार्यालय में हुए खूनी शूटआउट का सबसे दर्दनाक और रूह कंपा देने वाला अंत शनिवार को सामने आया। 12 दिनों तक जिंदगी और मौत से जंग लड़ने के बाद मुख्य पार्षद राजकुमार गुड्डू ने पटना के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ले ली। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे सुलतानगंज में मातम पसर गया। बाजार सूने हो गए, गलियों में सन्नाटा छा गया और हर आंख नम दिखाई दी।

12 दिन तक मौत से मुकाबला… लेकिन जिंदगी हार गई

28 अप्रैल को नगर परिषद कार्यालय में दिनदहाड़े चली गोलियों ने पूरे बिहार को दहला दिया था। उस खूनी हमले में राजकुमार गुड्डू को सिर, छाती और पेट में गोलियां लगी थीं। हालत बेहद गंभीर होने के कारण उन्हें भागलपुर से पटना रेफर किया गया। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम लगातार उन्हें बचाने में जुटी रही।

सूत्रों के मुताबिक, गुड्डू को लगातार वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। सिर में फंसी गोली को डॉक्टर नहीं निकाल सके। हर दिन खून चढ़ाया जा रहा था। दो दिन पहले उनकी हालत में हल्का सुधार दिखा तो समर्थकों और परिवार में उम्मीद जगी, लेकिन शुक्रवार रात अचानक तबीयत बिगड़ गई और शनिवार सुबह जिंदगी की डोर टूट गई।

नगर परिषद कार्यालय बना ‘मौत का मैदान’

जिस जगह जनता के काम होने चाहिए थे, वहां गोलियों की तड़तड़ाहट गूंज उठी। 28 अप्रैल को सैरात की डाक को लेकर बैठक चल रही थी। तभी तीन शूटर लुंगी और मुरेठा बांधकर नगर परिषद कार्यालय में दाखिल हुए। हथियार झोले में छिपाकर लाए गए थे ताकि किसी को शक न हो।

अचानक करीब सात राउंड फायरिंग हुई। अपराधियों का सीधा निशाना राजकुमार गुड्डू थे। गोलियों की आवाज से पूरा दफ्तर दहल उठा। इसी दौरान कृष्ण भूषण कुमार ने गुड्डू को बचाने की कोशिश की, लेकिन अपराधियों ने उन्हें भी गोलियों से छलनी कर दिया। उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

CCTV में कैद हुई पूरी ‘खूनी पटकथा’

यह पूरी वारदात CCTV कैमरों में रिकॉर्ड हो गई। फुटेज में साफ दिखा कि चार अपराधी बुलेट बाइक से पहुंचे थे। तीन हमलावर अंदर घुसे, जबकि एक बाहर निगरानी करता रहा। मुख्य आरोपी रामधनी यादव फुटेज में सबसे आगे दिखाई दिया।

घटना के बाद पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू की। बिहार पुलिस ने ऑपरेशन शिकंजा चलाते हुए रामधनी यादव को एनकाउंटर में मार गिराया। अब तक इस केस में पांच आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन पुलिस को अब भी शक है कि इस शूटआउट के पीछे एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय था।

“गुड्डू सिर्फ नेता नहीं, सुलतानगंज की पहचान थे”

स्थानीय लोगों की मानें तो राजकुमार गुड्डू ने पहली बार मुख्य पार्षद बनने के बाद नगर परिषद में विकास कार्यों को नई रफ्तार दी थी। विरोध और दबाव के बावजूद काम करना उनकी पहचान थी। उनका सरल स्वभाव, मुस्कुराता चेहरा और जनता से सीधा जुड़ाव उन्हें बाकी नेताओं से अलग बनाता था।

उनके निधन के बाद लोग भावुक होकर कह रहे हैं-“सुलतानगंज का चांद चला गया… अब शहर अपने चांद को ढूंढ रहा है।”

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

राजकुमार गुड्डू अपने पीछे पत्नी, 13 साल और 5 साल के दो छोटे बच्चों और बुजुर्ग मां को छोड़ गए हैं। घर में चीख-पुकार और मातम का माहौल है। पत्नी बेसुध है, बच्चे पिता को खोज रहे हैं और मां बार-बार यही कह रही हैं-“मेरा बेटा वापस आ जाए।”

शहर हाई अलर्ट पर, पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी

दोहरी हत्या—एक तरफ ईओ की मौत और दूसरी तरफ मुख्य पार्षद का निधन ने पूरे प्रशासन को अलर्ट मोड पर ला दिया है। पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। नगर परिषद क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

श्रावणी मेले से पहले यह घटना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। सुरक्षा एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क के सफेदपोश कनेक्शन की भी जांच कर रही हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल… साजिश का असली मास्टरमाइंड कौन?

सुलतानगंज ने सिर्फ एक जनप्रतिनिधि नहीं खोया, बल्कि ऐसा चेहरा खो दिया जिसने शहर को नई पहचान देने की कोशिश की थी। 12 दिनों तक चली यह जिंदगी की जंग अब एक बड़ा सवाल छोड़ गई है क्या इस खूनी साजिश का पूरा सच कभी सामने आएगा, या फिर यह मामला भी वक्त के साथ फाइलों में दबकर रह जाएगा?

अंजनी कुमार कश्यप विशेष रिपोर्ट