भागलपुर मे MDM प्रभारियों का तबादला, रैंडमाइजेशन प्रक्रिया पर उठे सवाल
Bihar News : डीएम के हस्तक्षेप के बाद मिड-डे-मिल के प्रभारियों के स्थानांतरण का आदेश शिक्षा विभाग ने जारी कर दिया है।हालांकि रैंडमाइजेशन प्रक्रिया से इस तबादले को लेकर कुछ कर्मचारियों में असंतोष व्याप्त है....
Bhagalpur : जिले में मध्याह्न भोजन योजना (MDM) के प्रखंड साधन सेवियों और प्रभारियों के स्थानांतरण को लेकर पिछले कई महीनों से चला आ रहा गतिरोध समाप्त हो गया है। जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी के कड़े रुख और हस्ताक्षेप के बाद शिक्षा विभाग ने शुक्रवार को रैंडमाइजेशन प्रक्रिया के जरिए नई ट्रांसफर-पोस्टिंग सूची जारी कर दी। लंबे समय से लंबित इस प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक गलियारों में काफी चर्चा थी और इसे विभाग में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
लंबे समय से जमे कर्मियों के एकाधिकार पर लगेगा अंकुश
प्रशासनिक स्तर पर दावा किया जा रहा है कि पूरी तबादला प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए रैंडमाइजेशन तकनीक का सहारा लिया गया है। इस आदेश के जारी होने के बाद जिले के विभिन्न प्रखंडों में नए प्रभारियों के योगदान की कवायद भी शुरू हो गई है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस व्यापक फेरबदल से मध्याह्न भोजन योजना के क्रियान्वयन में तेजी आएगी और व्यवस्था के भीतर लंबे समय से जमे कर्मियों के एकाधिकार पर अंकुश लगेगा।
रैंडमाइजेशन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल
हालांकि, नई सूची के सार्वजनिक होते ही विभागीय हलकों में विवाद की नई चिंगारी सुलग उठी है। रैंडमाइजेशन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कुछ कर्मियों ने आरोप लगाया है कि शाहकुंड और सन्हौला जैसे महत्वपूर्ण प्रखंडों के एमडीएम प्रभारियों को उनके पुराने स्थान पर ही यथावत रखा गया है। कर्मचारियों के बीच यह चर्चा तेज है कि जब पूरे जिले में व्यापक फेरबदल किया गया, तो इन चुनिंदा प्रखंडों को पूर्ववत रखकर किसे फायदा पहुँचाने की कोशिश की गई है।
विवाद और तकनीकी बिंदुओं पर स्पष्टीकरण के लिए जब जिला मैनेजर मनोज कुमार से संपर्क किया गया, तो उन्होंने मामले से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि रैंडमाइजेशन की तकनीकी जानकारी केवल जिला एनआईसी (NIC) कार्यालय के अधिकारी ही दे सकते हैं। दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर पक्ष जानने के लिए जब जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) बबीता कुमारी को फोन किया गया, तो उन्होंने फोन उठाना उचित नहीं समझा, जिससे विभागीय चुप्पी पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
फिलहाल, जिला प्रशासन द्वारा जारी तबादला सूची के बाद कई प्रखंडों में नए प्रभारियों ने अपना पदभार ग्रहण करना शुरू कर दिया है। लेकिन शाहकुंड और सन्हौला प्रखंड को लेकर उठ रहे सवालों ने प्रशासनिक पारदर्शिता की साख पर सवाल खड़ा कर दिया है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इन आरोपों पर क्या सफाई देता है और नई व्यवस्था जमीनी स्तर पर स्कूलों में एमडीएम की स्थिति को कितना सुधार पाती है।


बालमुकुंद की रिपोर्ट