Bihar School News: स्कूल में लगा ताला, प्रधानाध्यापक के खिलाफ बगावत, 38 दिन से बच्चों का बहिष्कार…
Bihar School News:पिछले 38 दिनों से बच्चों ने स्कूल का बहिष्कार कर रखा है। ...
Bihar School News: उत्क्रमित मध्य विद्यालय इन दिनों अजीबो-गरीब विवाद और तनाव का अखाड़ा बन गया है। यहां पिछले 38 दिनों से बच्चों ने स्कूल का बहिष्कार कर रखा है। ग्रामीणों और अभिभावकों ने प्रधानाध्यापक के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उनके तबादले की मांग को लेकर ऐसा घेराबंदी किया है कि पढ़ाई-लिखाई पूरी तरह ठप हो गई है।मामला भागलपुर के सुलतानगंज इलाके के बड़हरा स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय का है।
बताया जा रहा है कि विद्यालय में कुल 74 बच्चे नामांकित हैं, लेकिन पिछले एक महीने से एक भी छात्र स्कूल की चौखट तक नहीं पहुंच रहा। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि गुरुवार से शुरू होने वाली वार्षिक मूल्यांकन परीक्षा पर भी खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। अगर बच्चे परीक्षा में शामिल नहीं हुए, तो उनका अगला क्लास में दाखिला अधर में लटक सकता है।
मंगलवार को हालात का जायजा लेने के लिए प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी तनु कुमारी और बीआरसी के लेखापाल पवन कुमार स्कूल पहुंचे। अधिकारियों ने प्रधानाध्यापक से पूरे मामले की तफ्तीश की और हालात को समझने की कोशिश की। लेखापाल पवन कुमार ने बताया कि प्रधानाध्यापक ने भरोसा दिलाया है कि गुरुवार से बच्चे परीक्षा में शामिल होंगे और इसके लिए अभिभावकों से बातचीत की गई है।
लेकिन अधिकारियों के स्कूल पहुंचने की खबर जैसे ही गांव में फैली, वैसे ही करीब 60 से 70 की तादाद में ग्रामीण और महिलाएं स्कूल परिसर में जमा हो गए। उन्होंने बीईओ के सामने दो टूक लहजे में कहा कि जब तक प्रधानाध्यापक का तबादला नहीं होगा, तब तक बच्चे स्कूल की दहलीज पर कदम नहीं रखेंगे।
बीईओ तनु कुमारी ने ग्रामीणों को समझाने की भरपूर कोशिश की। उन्होंने कहा कि बच्चों का मुस्तकबिल सबसे अहम है और अगर वे परीक्षा में शामिल नहीं होंगे, तो पूरा शैक्षणिक साल बर्बाद हो सकता है। बावजूद इसके ग्रामीण अपनी मांग पर अडिग रहे।ग्रामीणों का इल्जाम है कि एक फरवरी को मुख्यमंत्री बिहार दर्शन योजना के तहत बच्चों को मंदार पर्वत घुमाने ले जाया गया था, जहां बच्चों के खाने-पीने का ठीक इंतजाम नहीं किया गया। इसी घटना के बाद गुस्सा भड़क उठा और दो फरवरी से स्कूल में पढ़ाई पर ताला लग गया।
अब हालात ऐसे बन गए हैं कि गुरुवार से होने वाली परीक्षा को लेकर भारी असमंजस की स्थिति है। अगर जल्द कोई हल नहीं निकला, तो दर्जनों मासूम छात्रों का भविष्य अंधेरे में डूब सकता है