Bihar News: SC/ST एक्ट के कानून के नाम पर FIR की बरसात? गांव के हर ब्राह्मण पर केस दर्ज, दिल्ली में नौकरी करने वालों को भी बनाया गया आरोपी

मजदूरी के बकाया की मांग से शुरू हुआ झगड़ा अब ऐसी एफआईआर में बदल चुका है, जिसमें पूरे गांव के ब्राह्मणों पर कानून की तलवार लटकती नजर आ रही है। प्राथमिकी में ऐसे नाम जोड़ दिए गए हैं, जो न मौके पर थे, न विवाद से उनका कोई लेना-देना था।

SC ST Act Misuse Alleged FIRs Filed Against Entire Brahmin V
SC/ST एक्ट के कानून के नाम पर FIR की बरसात- फोटो : reporter

Bihar News: मजदूरी के बकाया की मांग से शुरू हुआ झगड़ा अब ऐसी एफआईआर में बदल चुका है, जिसमें पूरे गांव के ब्राह्मणों पर कानून की तलवार लटकती नजर आ रही है। आरोपों की इस फेहरिस्त में SC/ST एक्ट की धाराएं ऐसे चलीं, जैसे थोक में नाम जोड़ने की खुली छूट मिल गई हो। दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र का हरिनगर गांव इन दिनों किसी वारदात से कम नहीं, जहां चंद रुपयों का लेन देन देखते ही देखते जातीय टकराव और कानूनी भूचाल में तब्दील हो गया। 

मामला 30 जनवरी का है, जब घर निर्माण की मजदूरी के करीब 2 लाख 47 हजार रुपये को लेकर कैलाश पासवान और हेमकांत झा के बीच कहासुनी हुई। आरोप है कि रास्ते में हेमकांत झा की बहन और बहनोई को रोककर धक्का-मुक्की की गई, जिसका लाइव वीडियो भी सामने आया। पंचायत हुई, समझाने की कोशिशें भी हुईं, मगर सुलह के बजाय आग में घी पड़ता गया। 31 जनवरी को वही विवाद पासवान और ब्राह्मण समुदाय के बीच हिंसक झड़प में बदल गया। मारपीट, तोड़फोड़, लूटपाट और 11 लोगों के जख्मी होने के आरोप सामने आए।

इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे गांव को दहशत में डाल दिया। अशर्फी पासवान के आवेदन पर 70 नामजद और 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ SC/ST सहित गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर दी गई। हालत यह है कि गांव के ब्राह्मण पुरुष गिरफ्तारी के डर से फरार हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या अपराध की जांच हो रही है या फिर कानून का इस्तेमाल सामूहिक डर पैदा करने के हथियार के तौर पर किया जा रहा है?

खास बात यह है कि खुद SC/ST के लिए काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी माना है कि प्राथमिकी में ऐसे नाम जोड़ दिए गए हैं, जो न मौके पर थे, न विवाद से उनका कोई लेना-देना था। उनकी मांग साफ है जो दोषी हैं, उन्हें बख्शा न जाए, लेकिन जो बेगुनाह हैं, उन्हें कानूनी चक्की में पीसना भी इंसाफ नहीं। यह वही कटु सच्चाई है, जहां कानून की मंशा सुरक्षा होती है, मगर दुरुपयोग से वह खुद सवालों के कटघरे में खड़ा हो जाता है।

अब तक 12 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिसकी पुष्टि SDPO बिरौल ने की है। उधर राज्य अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग के अध्यक्ष धनंजय कुमार उर्फ मृणाल पासवान डीएमसीएच पहुंचे, घायलों से मिले और कहा कि कुछ असामाजिक तत्वों ने पैसों के मामूली विवाद को दंगे की शक्ल दे दी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पीड़ितों को मुआवजा और इलाज मिलेगा, और सौहार्द बिगाड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।

हरिनगर की इस फाइल में सबसे बड़ा सवाल यही है क्या इंसाफ की राह सबूत से चलेगी या फिर धाराओं की बाढ़ में सच बह जाएगा? क्योंकि जब कानून का डर बेगुनाहों को गांव छोड़ने पर मजबूर कर दे, तो अपराध से ज्यादा खतरनाक उसकी परछाईं हो जाती है।