ANMMCH मे गार्ड और मरीज के तीमारदारों में भिड़ंत, सुरक्षा व्यवस्था और व्यवहार पर उठे सवाल

गया जी ANMMCH की सुरक्षा व्यवस्था पर एकबार फिर सवाल खड़ा हो गया है। अस्पताल में गार्ड और मरीज के परिजनों के साथ तीखी बहस और हाथापाई का मामला सामने आया है। परिजनों ने गार्ड पर वेवजह परेशान करने का आरोप लगाया है.....

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ANMMCH मे गार्ड और मरीज के तीमारदारों में भिड़ंत- फोटो : मनोज कुमार

Gayaji : अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (ANMMCH), गया में गार्ड और मरीज के परिजनों के बीच तीखी बहस के बाद हाथापाई का मामला सामने आया है। घटना के दौरान दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक गाली-गलौज और धक्का-मुक्की हुई। इस घटना के बाद से ही अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और सुरक्षाकर्मियों के रूखे व्यवहार को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।


गेट पर रोक-टोक और बदसलूकी से बढ़ा विवाद

जानकारी के मुताबिक, मरीज के परिजन और सुरक्षाकर्मियों के बीच अस्पताल में प्रवेश और पास दिखाने को लेकर कहासुनी शुरू हुई थी। परिजनों का आरोप है कि गार्ड बेवजह रौब दिखाते हैं और परिजनों से बदसलूकी करते हैं। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और हाथापाई शुरू हो गई। मामले में फिलहाल किसी भी पक्ष द्वारा पुलिस में लिखित शिकायत (तहरीर) नहीं दी गई है, जिससे पुलिसिया कार्रवाई नहीं हुई है।


इलाज के तनाव के बीच गार्डों का सख्त रवैया बना आफत

अस्पताल में आने वाले तीमारदारों का कहना है कि मरीज और उसके परिजन पहले से ही बीमारी और इलाज की चिंता में मानसिक तनाव में रहते हैं। ऐसे में गेट पर तैनात गार्ड नियमों का हवाला देकर रोक-टोक करते हैं, जो अक्सर कहासुनी का कारण बनता है। वहीं, मरीज के रिश्तेदार रंजय कुमार ने बताया कि वे बीते दो दिनों से मरीज का इलाज कराने के लिए अस्पताल का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन समुचित इलाज नहीं मिल रहा है; ऊपर से गार्ड बेवजह परेशान और दादागिरी करते हैं।


प्रशिक्षण और स्पष्ट नियमों से सुधर सकती है व्यवस्था

अस्पताल पहुंचे स्थानीय नागरिक रमेश प्रसाद और विजय सिंह का मानना है कि अस्पताल प्रशासन को गार्डों और तीमारदारों के बीच होने वाले रोज-रोज के विवाद को रोकने के लिए ठोस और स्पष्ट व्यवस्था बनानी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि भीड़ और तनावपूर्ण स्थिति को संभालने के लिए गार्डों को व्यावहारिक और व्यवहारगत प्रशिक्षण दिया जाना आवश्यक है। साथ ही परिजनों को भी प्रवेश नियमों की पूरी जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि मारपीट जैसी स्थितियों पर लगाम लग सके।

मनोज की रिपोर्ट