संयुक्त सचिव और DTO के आदेश ठेंगे पर! भारी पड़ी 'काली कमाई' की खनक! डोभी चेकपोस्ट पर आदेशों की धज्जियां!

गया डोभी चेकपोस्ट पर ट्रक चालकों से अवैध वसूली, मारपीट और तोड़फोड़ करने वाले डाटा एंट्री ऑपरेटर अभिषेक रंजन उर्फ सोनू को हटाने का संयुक्त सचिव और DTO का आदेश 2 महीने बाद भी लागू नहीं हो सका है।आरोप है कि रसूखदार सिंडिकेट ने विभागीय पत्र को ही दबा दि

संयुक्त सचिव और DTO  के आदेश ठेंगे पर! भारी पड़ी 'काली कमाई'

बिहार के सबसे संवेदनशील चेकपोस्टों में शुमार गया जिले के डोभी एकीकृत चेकपोस्ट पर इन दिनों प्रशासनिक आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। मगध प्रमंडल के संयुक्त आयुक्त-सह-सचिव (क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार, गया) द्वारा डाटा एंट्री ऑपरेटर अभिषेक रंजन उर्फ सोनू को डोभी चेकपोस्ट से तत्काल प्रभाव से हटाने का स्पष्ट आदेश जारी किया गया था। हालांकि, इस लिखित आदेश के दो महीने बीत जाने के बाद भी आरोपी ऑपरेटर अपनी मलाईदार कुर्सी पर मजबूती से डटा हुआ है।


अवैध वसूली, ट्रक चालक से मारपीट और तोड़फोड़ का मामला

पूरा मामला जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO), गया के पत्रांक-3182, दिनांक-07.08.2026 से जुड़ा है। बताया जाता है कि बीते 6 अगस्त को ट्रक संख्या HR73A3967 के चालक से दस्तावेज जांच के नाम पर अवैध वसूली को लेकर विवाद हुआ था। आरोप है कि ऑपरेटर अभिषेक रंजन और उसके गुर्गों ने चालक के साथ न केवल गाली-गलौज और मारपीट की, बल्कि ट्रक में तोड़फोड़ भी की। इस घटना के बाद आक्रोशित ड्राइवरों ने भारी हंगामा किया, जिससे एनएच पर घंटों यातायात बाधित रहा और सरकारी कार्य में बाधा पहुंची।


DTO की अनुशंसा और संयुक्त सचिव का सख्त आदेश

ट्रक चालकों के हंगामे और विधि-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने के बाद जिला परिवहन अधिकारी, गया ने पूरे मामले की जांच की। जांच के बाद DTO ने ऑपरेटर अभिषेक को डोभी चेकपोस्ट से हटाने की आधिकारिक अनुशंसा परिवहन विभाग से की। इसके आलोक में संयुक्त सचिव ने कड़ा रुख अपनाते हुए आदेश जारी किया था कि आरोपी ऑपरेटर को चेकपोस्ट से हटाकर उसके स्थान पर जिला परिवहन कार्यालय, गया के किसी अन्य ऑपरेटर को तत्काल प्रतिनियुक्त किया जाए।


आदेश की प्रतिलिपि में विधि-व्यवस्था बिगड़ने की चेतावनी

संयुक्त सचिव द्वारा जारी आदेश पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि— "अभिषेक रंजन के डोभी चेकपोस्ट पर बने रहने से भविष्य में भी कानून-व्यवस्था भंग होने की गंभीर आशंका बनी रहेगी। अतः जनहित एवं विभागीय कार्यहित को दृष्टिगत रखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था होने तक इनके स्थान पर किसी अन्य डाटा एंट्री ऑपरेटर को प्रतिनियुक्त करने की कृपा की जाए।" इस सख्त टिप्पणी के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई अमलीजामा नहीं पहनाया गया।


मुख्यालय स्तर पर पत्र को दबाने और साठगांठ का खेल

डोभी जैसे महत्वपूर्ण अंतरप्रांतीय चेकपोस्ट पर दिन-रात अवैध वसूली का खेल चलने की बातें आम हैं। सूत्रों की मानें तो संयुक्त सचिव द्वारा जारी आदेश की प्रतिलिपि बिहार सरकार के परिवहन सचिव, राज्य परिवहन आयुक्त (पटना) और जिलाधिकारी (गया) को भेजी गई थी। लेकिन कथित रूप से निचले स्तर के कुछ रसूखदार अधिकारियों और दलालों के सिंडिकेट ने मुख्यालय स्तर पर इस पत्र को विभागीय अधिकारियों की टेबल तक पहुंचने ही नहीं दिया और ठंडे बस्ते में डाल दिया।


प्रशासनिक सुशासन पर उठे सवाल, आखिर किसका मिला है संरक्षण?

यह पूरा घटनाक्रम राज्य सरकार के जीरो टॉलरेंस और सुशासन के दावों पर सीधे तौर पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सवाल उठना लाजमी है कि जब संयुक्त सचिव और DTO स्तर के अधिकारियों का आदेश दो महीने तक बेअसर साबित होता है, तो आखिरकार इस संविदा कर्मी ऑपरेटर को किसका वरदहस्त प्राप्त है? क्या डोभी चेकपोस्ट से होने वाली काली कमाई के आगे वरीय अधिकारियों के आदेश पूरी तरह बौने साबित हो रहे हैं?

धीरज पराशर की रिपोर्ट