Gaya crime: गया में युवक को खंभे से बांधकर पीटा! छेड़छाड़ के आरोप पर ‘भीड़ के इंसाफ’ पर सवाल

Gaya crime: गया के मोहनपुर में युवक को खंभे से बांधकर पीटने का वीडियो वायरल है। छेड़छाड़ के आरोप के बाद हुई घटना पर पुलिस जांच और भीड़ के इंसाफ को लेकर सवाल उठे हैं।

Gaya crime

Gaya crime:  बिहार के गया जिले में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो मोहनपुर थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। इसमें एक व्यक्ति को खंभे से बांधकर कुछ लोग उसकी पिटाई करते दिखाई दे रहे हैं।


सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि वीडियो में नजर आ रहा व्यक्ति अफजल मियां, ग्राम बभनी, मोहनपुर थाना क्षेत्र का रहने वाला है। उसके खिलाफ एक छात्रा से कथित छेड़छाड़ का आरोप लगाए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, वीडियो और इससे जुड़े सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।


छेड़छाड़ के आरोप के बाद हुई पिटाई


वायरल वीडियो में एक व्यक्ति को खंभे से बांधकर पीटते हुए देखा जा सकता है। घटना के पीछे छात्रा से कथित छेड़छाड़ का मामला बताया जा रहा है। हालांकि, वास्तव में घटना कैसे हुई और अफजल मियां की इसमें क्या भूमिका थी, यह पुलिस जांच के बाद ही साफ हो सकेगा। पुलिस ने अफजल मियां को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। अब जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि उसके खिलाफ लगाए गए आरोप कितने सही हैं और घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ था।


पत्नी ने बताई अलग कहानी


मामले को लेकर अफजल मियां की पत्नी सकीना खातून के हवाले से एक अलग दावा सामने आया है। उनके मुताबिक, वह अपने पति और बच्चे के साथ घर लौट रही थीं। इसी दौरान एक छात्रा के साथ एक युवक द्वारा कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई। छात्रा के शोर मचाने के बाद वह युवक वहां से भाग गया। सकीना का दावा है कि इसके बाद मौके पर मौजूद लोगों ने उनके पति अफजल मियां को पकड़ लिया और उन्हें खंभे से बांधकर पीटा। हालांकि, पत्नी के इस बयान की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस जांच में ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।


आरोप लगने का मतलब अपराध साबित होना नहीं


इस मामले में सबसे अहम सवाल कानून व्यवस्था को लेकर है। किसी व्यक्ति पर अपराध का आरोप लगना और अदालत में उसका अपराध साबित होना दो अलग बातें हैं। किसी आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने की जिम्मेदारी पुलिस और न्याय व्यवस्था की होती है। अगर किसी व्यक्ति पर छेड़छाड़ का आरोप है तो पुलिस को मामले की जांच करनी चाहिए और सबूतों के आधार पर कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। भीड़ को किसी व्यक्ति को पकड़कर खुद सजा देने का अधिकार नहीं है।


वीडियो में दिख रही मारपीट की भी जांच जरूरी


अब इस मामले में केवल अफजल मियां पर लगे आरोपों की जांच ही नहीं, बल्कि वायरल वीडियो में दिखाई जा रही मारपीट की भी जांच जरूरी है। पुलिस को यह पता लगाना होगा कि व्यक्ति को किसने पकड़ा, उसे खंभे से किसने बांधा और मारपीट में कौन-कौन लोग शामिल थे। अगर वीडियो में दिखाई गई घटना की पुष्टि होती है, तो कानून अपने हाथ में लेने वालों के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई का सवाल उठता है।


पुलिस जांच से साफ होगी पूरी सच्चाई


फिलहाल इस मामले में कई दावे सामने आ रहे हैं, लेकिन सभी तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए किसी भी पक्ष को अंतिम रूप से दोषी या निर्दोष मानना उचित नहीं होगा। पुलिस जांच से यह स्पष्ट होना चाहिए कि छात्रा के साथ कथित छेड़छाड़ की घटना वास्तव में हुई थी या नहीं, उसमें अफजल मियां की क्या भूमिका थी और वायरल वीडियो में दिखाई दे रही मारपीट के लिए कौन लोग जिम्मेदार हैं। किसी भी आरोप की सच्चाई अदालत और कानून की प्रक्रिया से तय होनी चाहिए। आरोप सही है तो दोषी को कानून के मुताबिक सजा मिलनी चाहिए और आरोप गलत है तो निर्दोष व्यक्ति को न्याय मिलना चाहिए। कानून का राज तभी मजबूत रहेगा, जब भीड़ को खुद फैसला करने और सजा देने की अनुमति नहीं होगी।


गया रिपोर्ट मनोज कुमार