गया: BSAP-3 में 1084 महिला सिपाहियों का पासिंग आउट परेड, आईजी विकास वैभव ने दिलाई निष्ठा की शपथ

बोधगया के BSAP-3 परिसर में शुक्रवार को एक ऐतिहासिक और गौरवमयी पासिंग आउट परेड सह दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया।इस दौरान देश सेवा का संकल्प लेने वाली महिला सिपाहियों के अभिभावक, माता-पिता, भाई और पति अत्यंत भारी संख्या में परिसर मे मौजूद रहे....

गया: BSAP-3 में 1084 महिला सिपाहियों का पासिंग आउट परेड, आईज
BSAP-3 में 1084 महिला सिपाहियों का पासिंग आउट परेड- फोटो : मनोज कुमार

Gayaji : जिले अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय पर्यटन नगरी बोधगया के बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस-3 (BSAP-3) परिसर में शुक्रवार को एक ऐतिहासिक और गौरवमयी पासिंग आउट परेड सह दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। इस भव्य समारोह में कुल 1084 नवनियुक्त महिला प्रशिक्षु सिपाहियों ने मुख्य अतिथि सह मगध प्रमंडल के आईजी (IG) विकास वैभव के समक्ष परेड कर सलामी दी। इसके बाद आईजी ने सभी पास आउट महिला सिपाहियों को पूरी निष्ठा, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा के साथ समाज की सेवा करने और राज्य में कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।


माता-पिता को पहनाई सम्मान की टोपी, भावुक हुए परिजन

इस दीक्षांत समारोह के दौरान देश सेवा का संकल्प लेने वाली महिला सिपाहियों के अभिभावक, माता-पिता, भाई और पति अत्यंत भारी संख्या में परिसर में मौजूद रहे। जैसे ही पासिंग आउट परेड संपन्न हुई, वैसे ही पूरा मैदान भावुक क्षणों का गवाह बन गया। प्रशिक्षण पूरा कर बिहार पुलिस के मुख्य बेड़े में शामिल हुईं इन जांबाज बेटियों ने अपने माता-पिता और परिजनों को अपनी आन, बान और शान का प्रतीक 'खाकी टोपी' पहनाई और उन्हें गर्व से सैल्यूट किया। बेटियों की इस ऐतिहासिक सफलता को देख कई माता-पिता की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।


विकसित बिहार के लिए भयमुक्त माहौल जरूरी: आईजी विकास वैभव

समारोह को संबोधित करते हुए मगध प्रमंडल के आईजी विकास वैभव ने कहा कि विकसित भारत और आत्मनिर्भर बिहार के निर्माण में पुलिस बल की भूमिका सबसे अहम है। उन्होंने एक दूरदर्शी लक्ष्य साझा करते हुए कहा कि वर्ष 2047 तक हमें एक ऐसे स्वर्णिम बिहार का निर्माण करना है, जहाँ सूबे के युवाओं को बेहतर शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए अपने घर और राज्य से बाहर पलायन न करना पड़े। इसके लिए प्रदेश में 'भयमुक्त और विश्वासयुक्त' माहौल बनाना पहली आवश्यकता है ताकि देश-विदेश के बड़े निवेशक बिहार आएं और यहां औद्योगिक विकास को नई गति मिले। उन्होंने हर पुलिसकर्मी से ईमानदारी से कर्तव्य निभाने का आह्वान किया।


किसान की बेटी ने पहले ही प्रयास में पाई सफलता, आगे दरोगा बनने का लक्ष्य

इस दीक्षांत समारोह में कई ऐसी प्रेरणादायक कहानियां भी सामने आईं, जो महिला सशक्तिकरण की मिसाल हैं। कटिहार जिले से आए एक मामा अपनी भगिनी (भांजी) की इस सफलता पर फूट-फूटकर रो पड़े। उनकी भांजी ने बताया कि उसने अपने पहले ही प्रयास में यह मुकाम हासिल किया है। उसके पिता एक साधारण किसान हैं और मां नर्स हैं। उसने गर्व से कहा कि उसकी पढ़ाई आगे भी जारी रहेगी और उसका लक्ष्य और ऊंचे पद पर जाने का है। उसके मामा ने भावुक होकर बताया कि उनकी भांजी ने एक साल के भीतर सरकारी नौकरी लेने का जो वादा किया था, उसे आज सच कर दिखाया है।


अनपढ़ माता-पिता की लाडली सुलेखा ने बढ़ाया मान, पूरे गांव में जश्न

इसी प्रकार, पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल की रहने वाली सुलेखा कुमारी ने भी कड़े प्रशिक्षण के बाद बिहार पुलिस में सिपाही के रूप में अपना स्थान सुनिश्चित किया है। सुलेखा की इस अद्भुत सफलता से उसका पूरा परिवार और गांव गौरवान्वित महसूस कर रहा है। सुलेखा ने बताया कि उसके माता-पिता पढ़े-लिखे नहीं हैं, इसके बावजूद उन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई और सपनों में कभी कोई बाधा नहीं आने दी। सुलेखा ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के त्याग को दिया और संकल्प जताया कि वह यहीं नहीं रुकेंगी, बल्कि अपनी मेहनत के दम पर आगे चलकर बिहार पुलिस में दरोगा (सब-इंस्पेक्टर) बनने के सपने को पूरा करेंगी।


मनोज की रिपोर्ट