Bihar News : मगध से आईजी का ताज क्यों छीना? गया में फूटा गुस्सा, कांग्रेस समेत लोगों का धरना, सरकार से फैसला वापस लेने की मांग

Bihar News : पटना के बाद सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक और ऐतिहासिक केंद्र माने जाने वाले मगध प्रमंडल में पुलिस व्यवस्था के पुनर्गठन को लेकर सियासत गरमा गई है।

Bihar News : मगध से आईजी का ताज क्यों छीना? गया में फूटा गुस
मगध प्रक्षेत्र से आईजी पद समाप्त करने का विरोध - फोटो : MANOJ

Gaya: पटना के बाद सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक और ऐतिहासिक केंद्र माने जाने वाले मगध प्रमंडल में पुलिस व्यवस्था के पुनर्गठन को लेकर सियासत गरमा गई है। गृह विभाग की आरक्षी शाखा द्वारा 29 जुलाई 2026 को जारी अधिसूचना के तहत मगध प्रक्षेत्र के लिए सात वर्ष पहले सृजित पुलिस महानिरीक्षक  के पद को समाप्त कर उसे पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) स्तर का बनाए जाने के फैसले के खिलाफ गया में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुआ।इस निर्णय के विरोध में गया के गांधी मैदान स्थित गेट नंबर-7 के समीप कांग्रेस पार्टी और विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से विशाल महाधरना आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार पर मगध क्षेत्र की प्रशासनिक अहमियत कम करने का आरोप लगाते हुए आईजी का पद तत्काल बहाल करने की मांग की।

धरना कार्यक्रम में बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रतिनिधि विजय कुमार मिट्ठू, पूर्व विधायक मोहम्मद खान अली, जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष युगल किशोर सिंह सहित कई नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। वक्ताओं ने कहा कि झारखंड गठन के बाद से ही गया को बिहार की दूसरी राजधानी बनाने की मांग समय-समय पर उठती रही है, लेकिन इसके विपरीत सरकार अब मगध प्रक्षेत्र का दर्जा घटाने का काम कर रही है।

नेताओं का कहना था कि मगध प्रक्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से पहाड़ी, वन क्षेत्र और लंबे समय तक नक्सल प्रभावित इलाका रहा है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में आईजी स्तर के अधिकारी की तैनाती सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और त्वरित प्रशासनिक फैसलों के लिए बेहद जरूरी है। उनका तर्क था कि आईजी का पद समाप्त कर डीआईजी स्तर पर लाना क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर करने वाला कदम साबित हो सकता है।

धरने में मौजूद नेताओं ने यह भी दावा किया कि हाल के महीनों में मगध प्रक्षेत्र में आईजी के रूप में कार्यरत आईपीएस अधिकारी विकास वैभव के नेतृत्व में आम लोगों, छात्रों और युवाओं को पुलिस व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव महसूस हुआ था। ऐसे समय में आईजी का पद ही समाप्त कर देने से लोगों में निराशा और असंतोष बढ़ा है।प्रदर्शनकारियों ने पूर्व डीआईजी अरविंद पांडेय का भी उल्लेख करते हुए कहा कि बेहतर कार्य करने वाले अधिकारियों का तबादला या पद परिवर्तन पहले भी लोगों के बीच चर्चा का विषय रहा है। अब आईजी का पद समाप्त करने के फैसले ने एक बार फिर मगधवासियों की भावनाओं को आहत किया है। धरना समाप्त होने के बाद नेताओं ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजकर मांग की कि गृह विभाग के इस निर्णय को तत्काल वापस लिया जाए और मगध प्रक्षेत्र में आईजी का पद पूर्ववत बहाल किया जाए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जनभावनाओं की अनदेखी की, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

रिपोर्ट- मनोज कुमार