Bihar News : गया जी में 40 देशों के श्रद्धालुओं ने फल्गु तट पर किया पिंडदान, युद्ध में मारे गए लोगों के लिए भी मांगी शांति

Bihar News : गया जी में 40 देशों के श्रद्धालुओं ने फल्गु तट

GAYAJI : मोक्ष की भूमि गया जी की महिमा अब सात समंदर पार तक गूँज रही है। सोमवार को गया शहर के फल्गु नदी तट स्थित देवघाट पर एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जहाँ विश्व के 40 अलग-अलग देशों से आए लगभग 76 विदेशी श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान के साथ अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और तर्पण किया। पारंपरिक परिधानों में सजे इन विदेशियों की सनातन धर्म के प्रति अटूट आस्था ने स्थानीय लोगों को भी मंत्रमुग्ध कर दिया।

सनातन परंपरा और विधि-विधान से कर्मकांड

स्थानीय पंडा छोटू बारिक के निर्देशन में इन श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पिंडदान संपन्न किया। पंडा जी ने बताया कि इन 76 श्रद्धालुओं की सनातन धर्म में गहरी रुचि और अटूट विश्वास है। वे विशेष रूप से अपने पूर्वजों को मोक्ष दिलाने की कामना के साथ गया धाम पहुँचे हैं। पिंडदान की प्रक्रिया के दौरान इन श्रद्धालुओं ने उन्हीं नियमों और मर्यादाओं का पालन किया, जो भारतीय हिंदू धर्मावलंबी करते हैं।

युद्ध पीड़ितों के लिए भी मांगी 'शांति': मानवीय संवेदना की मिसाल

पिंडदान के दौरान इन विदेशी श्रद्धालुओं ने न केवल अपने परिजनों को याद किया, बल्कि वैश्विक शांति का संदेश भी दिया। श्रद्धालुओं ने विशेष रूप से अमेरिका, ईरान, रूस और यूक्रेन जैसे देशों के बीच चल रहे युद्धों में मारे गए निर्दोष लोगों की आत्मा की शांति के लिए भी पिंडदान किया। यह पहल दर्शाती है कि गया जी की इस पावन भूमि से उन्होंने मानवता और विश्व कल्याण की प्रार्थना की है।

रूस से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक के श्रद्धालु शामिल

पिंडदान करने वाले इस बड़े जत्थे में अमेरिका, फ्रांस, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यूक्रेन और रूस सहित 40 देशों के नागरिक शामिल थे। इनमें से कई श्रद्धालु ऐसे हैं जो वर्षों से सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार से जुड़े हुए हैं। इतनी बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों का एक साथ पिंडदान करना गया धाम के वैश्विक महत्व को और अधिक पुष्ट करता है।

धर्म और संस्कृति का वैश्विक संगम

श्रद्धालुओं ने बताया कि वे गया जी की आध्यात्मिक ऊर्जा से बेहद प्रभावित हैं। उनके अनुसार, पूर्वजों के प्रति सम्मान व्यक्त करने की यह भारतीय पद्धति सबसे वैज्ञानिक और मानसिक शांति प्रदान करने वाली है। देवघाट पर आयोजित इस विशेष कर्मकांड के बाद पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा कि कैसे भारतीय संस्कृति भौगोलिक सीमाओं को लांघकर पूरे विश्व को एक सूत्र में पिरो रही है।

मनोज की रिपोर्ट