मुंगेर-मोकामा नेशनल हाईवे के लिए लखीसराय के 48 मौजों में 343 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण होगा।
मुंगेर-मोकामा नेशनल हाईवे के लिए लखीसराय के 48 मौजों में 343 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण होगा। अब तक 1.65 करोड़ रुपये का भुगतान, बाकी आवेदनों पर प्रक्रिया जारी।
लखीसराय: मुंगेर-मोकामा नेशनल हाईवे के निर्माण को लेकर लखीसराय जिले में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। सोमवार, 28 सितंबर 2026 को अनुमंडल पदाधिकारी प्रभाकर कुमार (बिहार प्रशासनिक सेवा) की अध्यक्षता में भूमि अधिग्रहण को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में पथ निर्माण विभाग के उप सचिव राकेश कुमार एवं अभिषेक कुमार, NHAI के पदाधिकारी, भू-अर्जन पदाधिकारी, लखीसराय समेत सभी संबंधित अंचलाधिकारी मौजूद रहे।
48 मौजों में 343 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण
बैठक में बताया गया कि मुंगेर-मोकामा नेशनल हाईवे के लिए लखीसराय जिले के 48 मौजों में कुल 343 हेक्टेयर भूमि का भू-अर्जन किया जाना है। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में सूर्यगढ़ा अंचल का हिस्सा सबसे अधिक है।
अधिकारियों के अनुसार, भूमि अधिग्रहण के लिए प्राप्त आवेदनों के आधार पर अब तक 1.65 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। वहीं, बड़ी संख्या में प्राप्त अन्य आवेदनों का भुगतान भी प्रक्रिया में है।
संयुक्त जमाबंदी बनी बड़ी समस्या
बैठक में भू-अर्जन पदाधिकारी ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में आ रही प्रमुख समस्याओं की जानकारी दी। बताया गया कि कई मामलों में 3D में भूमि संयुक्त जमाबंदी रैयतों के नाम दर्ज होने के कारण भुगतान में परेशानी आ रही है।
ऐसे मामलों में वंशावली और आवश्यकता पड़ने पर भूमि की मापी कराकर समस्या का समाधान किया जा सकता है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि जिन मामलों में स्वयं जमाबंदी रैयत मौजूद हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर चिह्नित किया जाए।
कैंप लगाकर लिए जाएंगे आवेदन
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए प्रस्तावित कैंप में अधिक से अधिक आवेदन प्राप्त करने का निर्णय लिया गया है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि कैंप के माध्यम से रैयतों को प्रक्रिया की जानकारी दी जाए और उनके लंबित मामलों का समाधान करने का प्रयास किया जाए।
इस दौरान ऐसे मामलों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया, जिनमें जमाबंदी सीधे संबंधित रैयत के नाम पर दर्ज है, ताकि भुगतान की प्रक्रिया को जल्द पूरा किया जा सके।
40 हेक्टेयर बकास्त भूमि का मामला
बैठक में भू-अर्जन पदाधिकारी ने बताया कि अधिग्रहण किए जाने वाले क्षेत्र में करीब 40 हेक्टेयर भूमि बकास्त भूमि है। इस संबंध में अनुमंडल पदाधिकारी ने अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए।
निर्देश के अनुसार प्रस्तावित कैंप में ऐसे रैयतों की सूची तैयार कर उनकी पहचान की जाएगी। इसके बाद संबंधित रैयतों को भूमि के रैयतीकरण की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी जाएगी।
रैयतों को भूमि सुधार उपसमाहर्ता के न्यायालय में ऑनलाइन आवेदन करने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा, ताकि आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर भूमि संबंधी मामलों का निपटारा किया जा सके।
प्रतिदिन आवेदन की रिपोर्ट देने का निर्देश
अनुमंडल पदाधिकारी प्रभाकर कुमार ने सभी संबंधित अंचलाधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रतिदिन प्राप्त होने वाले आवेदनों की संख्या की रिपोर्ट अनुमंडल कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए।
प्रशासन का लक्ष्य भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों को तेजी से निपटाते हुए हाईवे परियोजना के लिए आवश्यक जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है।