गया में भूतही नदी का बढ़ा जलस्तर: हल्की बारिश में चौथी बार बही पुलिया, 12 गांवों का संपर्क टूटा

गया जी जिले के मंझौली पंचायत में भूतही नदी पर बनी पुलिया हल्की बारिश के पानी का दबाव भी नहीं झेल सकी और ताश के पत्तों की तरह ढहकर बह गई। पुलिया के बह जाने से मंझौली सहित 12 से अधिक गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से पूरी तरह कट गया है....

गया में भूतही नदी का बढ़ा जलस्तर: हल्की बारिश में चौथी बार ब
हल्की बारिश में चौथी बार बही भूतही नदी पर बनी पुलिया- फोटो : मनोज कुमार

Gayaji : जिले के इमामगंज प्रखंड की मंझौली पंचायत में सरकारी दावों की पोल एक बार फिर खुल गई है। भूतही नदी पर बनी पुलिया हल्की बारिश के पानी का दबाव भी नहीं झेल सकी और ताश के पत्तों की तरह ढहकर बह गई। इस घटना के कारण मंझौली सहित आसपास के 12 से अधिक गांवों का संपर्क प्रखंड और जिला मुख्यालय से पूरी तरह कट गया है। बारिश की शुरुआत में ही जलस्तर बढ़ते ही चौथी बार पुलिया का बहना प्रशासनिक अनदेखी और घटिया निर्माण को उजागर करता है।


जीवनरेखा बनी आफत: ठप हुआ आवागमन, मरीज और छात्र परेशान

पुलिया टूटने से प्रभावित गांवों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। सबसे ज्यादा फजीहत स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और रोजमर्रा के काम के लिए बाहर जाने वाले ग्रामीणों को उठानी पड़ रही है। आपात स्थिति में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना परिजनों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जो रास्ता उनकी जीवनरेखा था, वही अब हर बारिश के मौसम में जानलेवा मुसीबत बनकर सामने खड़ा हो जाता है।


अस्थायी लीपापोती से नहीं चलेगा काम, हर साल बह जाता है सरकारी पैसा

यह पहला मौका नहीं है जब भूतही नदी की इस पुलिया ने जवाब दिया हो; इससे पहले भी तीन बार यह बारिश में ध्वस्त हो चुकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि हर बार पुलिया बहने के बाद जिम्मेदार अधिकारी केवल खानापूर्ति के लिए कामचलाऊ मरम्मत करवा देते हैं। यह कागजी लीपापोती पहली ही बारिश में पानी में बह जाती है, जिससे न केवल जनता की परेशानी बढ़ती है बल्कि सरकारी बजट का भी भारी नुकसान होता है।


ग्रामीणों का तीखा सवाल: आश्वासन नहीं, चाहिए पक्का समाधान

मंझौली पंचायत के निवासियों का कहना है कि यह केवल एक सड़क टूटने की समस्या नहीं है, बल्कि हजारों लोगों की सुरक्षा और दैनिक जीवन से जुड़ा मामला है। ग्रामीणों ने प्रशासन से सीधा सवाल किया है कि बार-बार अस्थायी इंतजाम पर बजट बर्बाद करने के बजाय एक ही बार में मजबूत पुलिया का निर्माण क्यों नहीं कराया जाता? ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि अब उन्हें कागजी वादे नहीं, बल्कि धरातल पर पक्का निर्माण चाहिए।


तत्काल आवागमन बहाली और पक्के निर्माण की मांग

स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि नदी में तुरंत वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था की जाए ताकि लोगों को राहत मिल सके। इसके साथ ही, नदी के जल-दबाव को सहन करने में सक्षम एक मजबूत और टिकाऊ पुलिया के निर्माण की प्रक्रिया बिना किसी देरी के शुरू की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो वे सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।


मनोज की रिपोर्ट