Bihar Teacher News: ट्रांसफर के आवेदन में इतनी गलतियां कि जारी हुआ शो-कॉज, शिक्षा मंत्री के गृह जिले में शिक्षा की स्थिति

Bihar Teacher News: शिक्षा मंत्री के गृह जिले में करीब 20 वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे एक पंचायत शिक्षक के स्थानांतरण आवेदन में कई त्रुटियां मिलने के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी ने स्पष्टीकरण मांग लिया है।...

Bihar Teacher Faces Show Cause Over Errors in Transfer Appli
ट्रांसफर आवेदन में गड़बड़ी- फोटो : reporter

Bihar Teacher News: गोपालगंज में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक मामला अब विभागीय कार्रवाई के घेरे में आ गया है। शिक्षा मंत्री के गृह जिले में करीब 20 वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे एक पंचायत शिक्षक के स्थानांतरण आवेदन में कई त्रुटियां मिलने के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी ने स्पष्टीकरण मांग लिया है। मामला कुचायकोट प्रखंड के अपग्रेड मिडिल स्कूल, सपहा से जुड़ा है, जहां पंचायत शिक्षक बबलू राय कार्यरत हैं।

 गोपालगंज में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बिहार के शिक्षा मंत्री के गृह जिले में करीब 20 साल से शिक्षण कार्य कर रहे एक पंचायत शिक्षक के ट्रांसफर आवेदन में कई गलतियां मिली हैं। आवेदन की जांच के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी अमरेंद्र कुमार पांडेय ने शिक्षक से स्पष्टीकरण मांगा है।

एक तरफ इसी गोपालगंज से शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चुने जाने की खबर सामने आ रही है, तो दूसरी तरफ एक शिक्षक के ट्रांसफर आवेदन में इतनी खामियां मिलीं कि शिक्षा विभाग को शो-कॉज नोटिस जारी करना पड़ा। अब सवाल यह है कि अगर लंबे समय से शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षक को अपना आवेदन भी सही तरीके से लिखना नहीं आ रहा है, तो बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

पूरा मामला कुचायकोट प्रखंड के अपग्रेड मिडिल स्कूल, सपहा का है। यहां कार्यरत पंचायत शिक्षक बबलू राय ने स्थानांतरण के लिए ई-कोष के माध्यम से अपना आवेदन अपलोड किया था।विभागीय स्तर पर जब आवेदन की जांच की गई, तो उसमें कई तरह की त्रुटियां सामने आईं। आवेदन में खामियां मिलने के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी अमरेंद्र कुमार पांडेय ने शिक्षक बबलू राय से स्पष्टीकरण मांगा है।शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई के बाद शिक्षकों के बीच भी हड़कंप मच गया है। क्योंकि मामला सिर्फ ट्रांसफर आवेदन में गलती का नहीं है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर रहा है कि करीब दो दशक से शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षक को विभागीय प्रक्रिया से जुड़े एक आवेदन को सही तरीके से भरने में परेशानी क्यों हुई?गोपालगंज में शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर के दो अलग-अलग पहलू सामने आ रहे हैं। एक ओर जिले के शिक्षकों के बेहतर कार्य और उपलब्धियों की चर्चा राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच रही है और शिक्षकों को राष्ट्रपति के हाथों राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार मिलने की खबर सामने आ रही है।वहीं दूसरी ओर, इसी जिले में करीब 20 वर्षों से कार्यरत एक पंचायत शिक्षक के ट्रांसफर आवेदन में कई त्रुटियां मिलने के बाद शिक्षा विभाग को स्पष्टीकरण मांगना पड़ा है।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर शिक्षक की जिम्मेदारी सिर्फ बच्चों को पढ़ाने तक सीमित है या फिर विभागीय कामकाज और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी रखना भी उनकी जिम्मेदारी है?अगर एक शिक्षक को सामान्य विभागीय आवेदन भी सही तरीके से लिखने में परेशानी हो रही है, तो निश्चित तौर पर यह मामला शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों की कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।जिला शिक्षा पदाधिकारी अमरेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि पंचायत शिक्षक की ओर से स्थानांतरण के संबंध में आवेदन किया गया था। जांच के दौरान आवेदन में बहुत सारी त्रुटियां पाई गईं, जिसके बाद शिक्षक से स्पष्टीकरण मांगा गया है।

डीईओ के मुताबिक शिक्षक की ओर से करीब 20 वर्षों से शिक्षण कार्य करने की बात बताई गई है, लेकिन इसके बावजूद आवेदन सही तरीके से नहीं भरा गया। शिक्षक को अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया गया है। उनका जवाब मिलने के बाद मामले में नियमानुसार अग्रेतर कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल शिक्षक से स्पष्टीकरण मांगा गया है और अब विभाग को उनके जवाब का इंतजार है। जवाब मिलने के बाद ही यह साफ होगा कि आवेदन में इतनी गलतियां कैसे हुईं और विभाग इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करता है।लेकिन इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है - जब शिक्षक ही अपना आवेदन सही तरीके से नहीं लिख पाएंगे, तो आखिर बिहार के बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी किसके हाथों में है?

रिपोर्ट- नमोनारायण मिश्रा