Bihar Land Scam: बिहार में गैरमजरुआ जमीन का खेल! 85 डिसमिल जमीन बन गई 1 एकड़
Bihar Land Scam: सरकारी जमीन और राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेरफेर का सनसनीखेज मामला सामने आया है।....
Bihar Land Scam: सरकारी जमीन और राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेरफेर का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जमुई के सोनो प्रखंड से सरकारी जमीन और राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेरफेर का सनसनीखेज मामला सामने आया है। डुमरी खास मौजा में गैरमजरुआ जमीन को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज के सहारे बेचने, जमाबंदी कायम कराने और ऑनलाइन रिकॉर्ड में रकबा बढ़ाने के आरोप लगे हैं। मामले में डुमरी निवासी हीरा पाण्डेय उर्फ दिवाकर पाण्डेय ने सोनो अंचलाधिकारी को आवेदन देकर पूरे प्रकरण की जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।आवेदन के मुताबिक मौजा डुमरी खास की खाता संख्या 180 और खेसरा संख्या 20 की 85 डिसमिल जमीन खतियान में गैरमजरुआ के रूप में दर्ज है। आरोप है कि इस जमीन पर सोनो निवासी विद्या सिंह ने बिना किसी वैध अंचल आदेश और जरूरी दस्तावेज के जमाबंदी संख्या 1276/690 कायम करा ली।मामला यहीं नहीं रुका। आरोप है कि इसके बाद कथित मिलीभगत से गैरमजरुआ जमीन को दस्तावेज संख्या 6793, दिनांक 2 दिसंबर 2025 के जरिए बेच दिया गया। शिकायतकर्ता ने राजस्व कर्मचारी ब्रजकिशोर पाण्डेय की भूमिका पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
85 डिसमिल जमीन कैसे बन गई 1 एकड़?
शिकायत में सबसे गंभीर आरोप ऑनलाइन परिमार्जन को लेकर लगाया गया है। आवेदनकर्ता का दावा है कि जमीन की बिक्री के बाद कथित तौर पर 25 लाख रुपये लेकर ऑनलाइन रिकॉर्ड में 85 डिसमिल के बजाय 1 एकड़ जमीन दर्ज कर दी गई।इसके बाद केस संख्या 2041/2025-26 के तहत दाखिल-खारिज किए जाने का भी आरोप है। शिकायतकर्ता का कहना है कि हैरानी की बात यह है कि जिस जमीन की खरीद-बिक्री की गई, उस पर न कथित विक्रेता का दखल-कब्जा था और न ही खरीदार का।अगर जांच में ये आरोप सही साबित होते हैं तो यह सिर्फ जमीन विवाद का मामला नहीं रहेगा, बल्कि राजस्व रिकॉर्ड, जमाबंदी और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता का मामला बन सकता है।
CO ने जांच का दिया भरोसा
मामले की गंभीरता को देखते हुए सोनो की अंचलाधिकारी निकिता कुमारी ने बताया कि प्रकरण उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने वरीय पदाधिकारी को इसकी सूचना देने के साथ ही संबंधित हल्का कर्मचारी से स्पष्टीकरण मांगे जाने की बात कही है।अंचलाधिकारी के मुताबिक फिलहाल पूरे मामले की जांच की जा रही है। जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन के साथ खतियान, केवाला और पंजी-II की प्रतियां भी संलग्न की हैं। अब जांच में इन दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड का मिलान किया जाएगा। यह भी देखा जाएगा कि गैरमजरुआ जमीन पर जमाबंदी किस आधार पर कायम हुई, जमीन की बिक्री कैसे हुई और ऑनलाइन रिकॉर्ड में कथित तौर पर रकबा बढ़ाने की प्रक्रिया किस स्तर पर हुई।जमुई के इस मामले ने एक बार फिर जमीन के रिकॉर्ड में पारदर्शिता और राजस्व व्यवस्था की निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर प्रशासनिक जांच के नतीजे पर है कि 85 डिसमिल जमीन के 1 एकड़ बनने का कथित खेल आखिर कैसे हुआ और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे।
सुमित सिंह की रिपोर्ट