Bihar Health: न्यूज4नेशन के खबर का बड़ा असर,जमुई में एम्बुलेंस का तेल खत्म और खत्म हो गई जिंदगी, सिस्टम की लापरवाही उजागर होने के बाद डीएम का चला डंडा, FIR के आदेश

जमुई से पटना इलाज के लिए रेफर किए गए एक 75 वर्षीय बुजुर्ग मरीज को एम्बुलेंस की बदहाली ने मौत के मुंह में धकेल दिया। न्यूज4नेशन पर खबर चलने के बाद अब प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का चाबुक चलाया है।..

Jamui Patient Dies as Ambulance Runs Out of Fuel DM Orders F
न्यूज4नेशन के खबर का बड़ा असर- फोटो : reporter

Bihar Health: स्वास्थ्य विभाग की एक ऐसी घोर लापरवाही सामने आई है जिसने पूरी मानवता को शर्मसार कर दिया है। जमुई से पटना इलाज के लिए रेफर किए गए एक 75 वर्षीय बुजुर्ग मरीज को एम्बुलेंस की बदहाली ने मौत के मुंह में धकेल दिया। मामला तब सामने आया जब रास्ते में एम्बुलेंस का तेल खत्म हो गया और भीषण गर्मी में तड़प-तड़प कर मरीज ने दम तोड़ दिया। अब प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का चाबुक चलाया है।

मृतक की पहचान 75 वर्षीय धीरज रविदास के रूप में हुई है। उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें पहले झाझा में प्राथमिक उपचार दिया गया, फिर जमुई सदर अस्पताल रेफर किया गया। वहां से उन्हें बेहतर इलाज के लिए पटना भेजा जा रहा था। परिजनों का आरोप है कि सिकंदरा के समीप पहुंचते ही एम्बुलेंस का ईंधन (तेल) खत्म हो गया और गाड़ी बीच सड़क पर ही रुक गई। चालक ने तेल लाने में जो देरी की, वह मरीज की जान पर भारी पड़ गई। भीषण गर्मी के बीच मरीज की स्थिति बिगड़ती गई और वक्त पर अस्पताल न पहुंच पाने के कारण उनकी मौत हो गई।

इस घटना के बाद से ही जिला प्रशासन हरकत में है। जमुई के जिलाधिकारी (DM) ने इस पूरी घटना को 'अतिगंभीर लापरवाही' मानते हुए तत्काल प्रभाव से संबंधितों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश जारी कर दिया है। डीएम ने स्पष्ट कहा है कि इस मामले में किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जमुई के सिविल सर्जन-सह-जिला स्वास्थ्य समिति के सचिव ने एम्बुलेंस सेवा प्रदाता 'एलेंसी जेन प्लस प्राइवेट लिमिटेड' के क्लस्टर लीडर को तलब किया है। उनसे तत्काल स्पष्टीकरण की मांग की गई है कि इस घातक लापरवाही के लिए कंपनी के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए। विभाग ने पूछा है कि एक जीवन रक्षक वाहन में ईंधन की कमी कैसे हो गई, जो मरीज की मौत का कारण बनी।

यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर चल रहे निजी संचालकों की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े करती है। क्या महज FIR से पीड़ित परिवार को इंसाफ मिल पाएगा? या फिर स्वास्थ्य विभाग ऐसे सेवा प्रदाताओं के खिलाफ कोई ठोस और मिसाली  कार्रवाई करेगा, ताकि भविष्य में किसी और मरीज को एम्बुलेंस के 'तेल' के कारण अपनी जान न गंवानी पड़े? प्रशासन की अगली कार्रवाई पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं।