Bihar NEET student death:इंसाफ की तलाश में 25 किलोमीटर की पदयात्रा, जहानाबाद में NEET छात्रा केस पर सड़क पर उतरा जनसैलाब, सरकार पर कवर-अप का संगीन इल्ज़ाम
Bihar NEET student death: जहानाबाद में नीट छात्रा को इंसाफ़ दिलाने की मांग अब फाइलों से निकलकर सड़कों पर आ गई है। ....
Bihar NEET student death: जहानाबाद में नीट छात्रा को इंसाफ़ दिलाने की मांग अब फाइलों से निकलकर सड़कों पर आ गई है। पतियवा गांव से शुरू हुई यह न्याय यात्रा जहानाबाद समाहरणालय तक बढ़ी, जहां सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्थानीय लोगों और पीड़ित परिवार के समर्थकों ने एक सुर में हक़ और इंसाफ़ की गुहार लगाई। काले झंडों के साए में निकला यह विरोध मार्च अपराध के खिलाफ़ एक खुला ऐलान था कि अब चुप्पी नहीं, जवाब चाहिए।

करीब 35 किलोमीटर की पैदल पदयात्रा में शामिल लोग नारेबाज़ी करते रहे “दोषियों को सज़ा दो”, “कानून की हिफ़ाज़त करो”, “इंसाफ़ से समझौता नहीं।” मार्च का मक़सद साफ़ था: नीट छात्रा के मामले में जिन हाथों ने कानून को ठेंगा दिखाया, उन तक कानून का शिकंजा पहुँचे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि घटना को कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन अपराधी अब भी आज़ाद हैं यह देरी नहीं, साज़िश लगती है।

मार्च में शामिल लोगों ने आरोप लगाया कि सरकार प्रभावशाली गुनहगारों को बचाने और केस को दबाने की कोशिश कर रही है। उनके मुताबिक़, तफ्तीश की रफ़्तार सुस्त है, गिरफ़्तारियां नदारद हैं और जवाबदेही धुंधली। इस दौरान एक गंभीर दावा भी उछाला गया कि बिहार के डीजीपी कार्यालय में पीड़ित माता-पिता पर आत्महत्या मानने का दबाव बनाया गया। प्रदर्शनकारियों ने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि ऐसे आरोप पुलिस और सत्ता की नीयत पर काले साए डालते हैं।

जुलूस के दौरान माहौल में ग़म और ग़ुस्सा साथ-साथ चलता दिखा। महिलाएं, बुज़ुर्ग, युवा सबकी ज़ुबान पर एक ही सवाल: “क़ानून कब बोलेगा?” प्रदर्शनकारियों ने ऐलान किया कि जब तक पीड़ित परिवार को इंसाफ़ नहीं मिलेगा, आंदोलन थमेगा नहीं। चाहे कितनी ही लीपापोती क्यों न हो, वे हक़ की लड़ाई को अंजाम तक पहुँचाएंगे।

अंत में न्याय यात्रा डीएम कार्यालय पहुँची, जहां ज्ञापन सौंपने की तैयारी है। संदेश दो टूक है अगर इंसाफ़ में देर हुई, तो यह देरी खुद एक नया जुर्म बन जाएगी।
जहानाबाद से विक्रमादित्य की रिपोर्ट