Bihar tempo Love Story: पति परदेस में मेहनत कर रहा था, पत्नी चार बच्चों के बाप टेम्पो वाले के साथ होटल में मना रही थी रंगरेलियां, पकड़े जाने पर पंचायत ने सुनाया अनोखा फैसला
Bihar tempo Love Story:काजल जो खुद एक बच्चे की माँ है और जिसका पति परदेस में रोजी-रोटी की जद्दोजहद कर रहा है उस टेम्पो पर सवार होती है, जिसका सारथी रणधीर है।...
Bihar tempo Love Story: जब इश्क की गाड़ी पटरी से उतर जाए और मंजिल कोई होटल का कमरा बन जाए, तो पंचायत सजाकर उसे नया दे दिया जाता हैं। जहानाबाद और मसौढ़ी के बीच का यह वाकया महज एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि हमारे समाज का आईना है, जहाँ रिश्तों की मर्यादा को ताक पर रखकर भावनाओं का बाजार सजाया जाता है। कहानी शुरू होती है एक खटारा टेम्पो से। मुसाफिर काजल जो खुद एक बच्चे की माँ है और जिसका पति परदेस में रोजी-रोटी की जद्दोजहद कर रहा है उस टेम्पो पर सवार होती है, जिसका सारथी रणधीर है। रणधीर पहले से ही चार बच्चों के खुशनसीब पिता हैं। सफर महज चंद किलोमीटर का था, लेकिन नंबरों के आदान-प्रदान ने इस सफर को इश्क के सफर-ए-जिंदगी में तब्दील कर दिया। फिर क्या था? दिलों के तार ऐसे जुड़े कि परदेस में बैठे पति की आहें और घर की इज्जत हवा हो गई।
जब ससुराल वालों की निगाहें इस कथित पाक मोहब्बत पर पड़ीं, तो उन्होंने पीछा करना लाजिमी समझा। मसौढ़ी के एक होटल में जब दोनों परिंदों को दबोचा गया, तो लगा कि अब कोई बड़ा भूचाल आएगा। लेकिन यह बिहार की सरजमीन है, यहाँ ड्रामे का क्लाइमैक्स कुछ अलग ही अंदाज में होता है। पुलिस या कानून के शिकंजे में भेजने के बजाय, खाप नुमाइंदा नुमा ग्रामीणों ने गांव के सेवनन में एक और तमाशा-ए-इश्क सजा दिया।
अब जरा इस मंजर की कल्पना कीजिए एक तरफ चार मासूम बच्चों की माँ फफक-फफक कर रो रही है, जिसका सुहाग चंद मिनटों में किसी और की झोली में डाला जा रहा है, और दूसरी तरफ सामाजिक न्याय का ढिंढोरा पीट रहा है। क्या यह महज एक शादी है या फिर बेबस और लाचार पहली बीवी के आंसुओं का सौदा? टेम्पो वाले रणधीर ने तो अपनी गाड़ी की सीट पर नया मुसाफिर बिठा लिया, मगर उन चार मासूमों का क्या, जिनके सिर से बाप का साया एक झटके में छिन गया? ग्रामीणों की मौजूदगी में दोनों की शादी करा दी गई। इस दौरान रणधीर की पहली पत्नी भी अपने चार बच्चों के साथ मौके पर मौजूद थी। पति की दूसरी शादी होते देख पहली पत्नी फूट-फूटकर रोती रही। और दूसरी....
यह वाकया सिर्फ एक सनसनीखेज खबर नहीं, बल्कि इस बात की गवाही है कि आज के दौर में नैतिकता और पारिवारिक मूल्यों का जनाजा किस कदर धूमधाम से निकाला जा रहा है। इश्क अंधा जरूर होता है, लेकिन जब वह बेगैरती की हदें पार कर ले, तो उसे मोहब्बत नहीं बल्कि फरेब और तमाशा ही कहा जाएगा।
रिपोर्ट : बिक्रमादित्य कुमार