Bihar Health System: DM की आधी रात की दबिश में खुला स्वास्थ्य व्यवस्था का काला सच, बड़हिया अस्पताल में बंद मिला करोड़ों का भवन, गायब डॉक्टर और फर्जी रोस्टर का खेल देख कर हैरान हो गए साहब
Bihar Health System: सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत जानने जब जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार आधी रात को बड़हिया रेफरल अस्पताल पहुंचे तो वहां एक के बाद एक ऐसी परतें खुलती चली गईं, जिसने पूरे स्वास्थ्य महकमे को कठघरे में खड़ा कर दिया।...
Lakhisarai: रात का सन्नाटा था, अस्पताल की लाइटें जल रही थीं, लेकिन मरीजों की उम्मीदों का सिस्टम अंधेरे में पड़ा था। सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत जानने जब जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार आधी रात को बड़हिया रेफरल अस्पताल पहुंचे तो वहां एक के बाद एक ऐसी परतें खुलती चली गईं, जिसने पूरे स्वास्थ्य महकमे को कठघरे में खड़ा कर दिया।
बंद पड़ा नया अस्पताल भवन, ड्यूटी से गायब डॉक्टर, बिना रोस्टर ड्यूटी करते आयुष चिकित्सक और कागजों में चलती व्यवस्था,डीएम की मिडनाइट रेड ने अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही का पूरा कच्चा चिट्ठा सामने रख दिया। 17 और 18 जुलाई की रात हुए औचक निरीक्षण के बाद तैयार तीन पन्नों की रिपोर्ट में अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। जिलाधिकारी ने साफ कर दिया है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ और ड्यूटी में मनमानी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
निरीक्षण का सबसे बड़ा खुलासा यह रहा कि बड़हिया रेफरल अस्पताल का नया भवन बंद पड़ा था। जबकि पहले ही निर्देश दिया गया था कि अस्पताल की सभी सेवाएं नए भवन से 24 घंटे संचालित की जाएं। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही निकली। इमरजेंसी और आईपीडी सेवाएं अब भी पुराने भवन से चल रही थीं। करोड़ों रुपये खर्च कर बनाया गया आधुनिक भवन सफेद हाथी बना हुआ था। डीएम ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि जब सुविधा उपलब्ध है तो मरीजों को पुराने और सीमित संसाधनों वाले भवन में क्यों रखा जा रहा है। उन्होंने सिविल सर्जन को तत्काल व्यवस्था बदलने और सभी सेवाओं को नए भवन में शिफ्ट करने का आदेश दिया।
निरीक्षण के दौरान अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी भी मौके से नदारद मिले। नियम के मुताबिक प्रभारी अधिकारी को मुख्यालय में रहकर अस्पताल की व्यवस्था संभालनी होती है, लेकिन यहां जिम्मेदारी से दूरी का मामला सामने आया। डीएम की रिपोर्ट में इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताया गया है। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी से जवाब तलब किया गया है और यह तक पूछने का निर्देश दिया गया कि आखिर उन्हें पद से क्यों न हटाया जाए।
मिडनाइट रेड में सबसे चौंकाने वाला मामला ड्यूटी रोस्टर को लेकर सामने आया। अस्पताल में जिन डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई थी, वे मौके पर मौजूद नहीं थे। 17 जुलाई की दूसरी पाली में डॉ. वंदना कुमारी और डॉ. मनीष कुमार साहू की ड्यूटी थी, जबकि रात्रि पाली में डॉ. पल्लवी भारती को जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन जांच के समय तीनों चिकित्सक गायब मिले। और तो और, डॉ. मनीष कुमार साहू पहले ही सीनियर रेजीडेंसी के लिए अस्पताल से मुक्त हो चुके थे, फिर भी उनका नाम रोस्टर में चलता रहा। इसने रोस्टर तैयार करने की पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए। डीएम ने अनुपस्थित डॉक्टरों से जवाब मांगने और अंतिम निर्णय तक वेतन रोकने का निर्देश दिया है।
निरीक्षण के दौरान आयुष चिकित्सक डॉ. आशुतोष प्रताप अस्पताल में मौजूद मिले। उन्होंने बताया कि उनकी ड्यूटी अस्पताल में लगी है। लेकिन जब रोस्टर खंगाला गया तो हकीकत सामने आ गई। 17 जुलाई की रात उनके नाम से कोई ड्यूटी निर्धारित ही नहीं थी। वह कोई लिखित आदेश भी पेश नहीं कर सके। डीएम ने सवाल उठाया कि आखिर किस आदेश पर बिना रोस्टर कोई चिकित्सक रात में ड्यूटी कर रहा था और जांच टीम को गलत जानकारी देने की कोशिश क्यों की गई।
पहली कार्रवाई के बाद 18 जुलाई की रात जिलाधिकारी दोबारा अस्पताल पहुंचे। इस बार नया भवन खुला मिला और मरीजों का इलाज भी चल रहा था, लेकिन व्यवस्था में सुधार की तस्वीर अधूरी थी। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी फिर गायब मिले। नियमित एमबीबीएस डॉक्टर भी मौजूद नहीं थे। अस्पताल में केवल आयुष चिकित्सक और इमरजेंसी सेवा के सहारे व्यवस्था चलती मिली। रिपोर्ट में कहा गया कि पांच डॉक्टरों की तैनाती के बावजूद रात की स्वास्थ्य सेवा कमजोर है और अधिकांश चिकित्सक शाम होते ही मुख्यालय छोड़ देते हैं।
डीएम ने अब अस्पताल की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने का आदेश दिया है। नए भवन में तत्काल CCTV कैमरे और बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लगाने के निर्देश दिए गए हैं।भविष्य में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों का वेतन भी बायोमेट्रिक हाजिरी के आधार पर तय करने की अनुशंसा की गई है। स्वीकृत रोस्टर को अस्पताल परिसर में सार्वजनिक रूप से लगाने का आदेश दिया गया है।
जिलाधिकारी ने सिविल सर्जन को निर्देश दिया है कि अगले आदेश तक हर दिन रात 8 बजे बड़हिया अस्पताल की स्थिति की जानकारी दें। साथ ही लगातार तीन दिनों तक रात्रिकालीन इमरजेंसी सेवा की व्यक्तिगत निगरानी करने को कहा गया है।बड़हिया अस्पताल की यह कहानी सिर्फ एक स्वास्थ्य केंद्र की लापरवाही नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है जहां करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद मरीजों को समय पर डॉक्टर नहीं मिलते।
डीएम की कार्रवाई ने साफ संदेश दे दिया है कि अब कागजों पर चलने वाली व्यवस्था, फर्जी रोस्टर और ड्यूटी से गायब रहने वालों पर प्रशासन की नजर है। आने वाले दिनों में इस मामले में और कार्रवाई की संभावना से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
रिपोर्ट- कमलेश कुमार