Bihar News : मंगल पाण्डेय के स्वास्थ्य विभाग को डॉक्टर दे रहे चकमा! ओपीडी में जो डॉक्टर बैठते ही नहीं उन्हें स्वास्थ्य मंत्री ने जारी किया प्रशंसा पत्र, रेफरल अस्पताल बड़हिया में हुआ भंडाफोड़

Bihar News : बिहार के लखीसराय जिले रेफरल अस्पताल बड़हिया में ओपीडी में पर्चा किसी और डॉक्टर के नाम से कटता है और ड्यूटी किसी दूसरे की होती है. उससे भी हैरानी की बात है कि उपचार के लिए कोई तीसरे डॉक्टर होते हैं. वहीं जिनके नाम से पर्चा कटता है वे कभी

Referral Hospital Barhiya
Referral Hospital Barhiya- फोटो : news4nation

Bihar News : बिहार के स्वास्थ्य मंत्री अपने जिस अस्पताल को सर्वाधिक ओपीडी यानी वाह्य रोगियों को सेवा प्रदान करने हेतु प्रशंसा पत्र जारी करते हैं उस अस्पताल में ओपीडी का पर्चा किसी और डॉक्टर के नाम से कटता है और ड्यूटी में दूसरे डॉक्टर होते होते हैं. इतना ही नहीं जिनकी ड्यूटी होती है वे भी गायब रहते हैं और कोई तीसरे डॉक्टर व्यवस्था संभाले मिलते हैं. ओपीडी में मरीजों को देखने के नाम पर हो रहे एक किस्म के इस फर्जीवाड़े से आम लोगो को भी उपचार में परेशानी झेलनी पड़ती है. 


स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय ने पिछले महीने लखीसराय जिले के बड़हिया रेफरल अस्पताल को फरवरी  2025 महीने में सर्वाधिक वाह्य रोगियों को सेवा प्रदान करने हेतु प्रशंसा पत्र जारी किया था. मंगल पाण्डेय ने अस्पताल के प्रभारी डॉ उमेश प्रसाद सिंह के नाम से जारी पत्र में कहा कि 'मुझे अत्यंत खुशी हो रही है कि आपने माह फरवरी 2025 में बिहार राज्य में सर्वाधिक वाह्य रोगियों को सेवा प्रदान किया है। आपके इस समर्पण एवं सेवाभाव के लिए में आपको व्यक्तिगत रूप से बधाई देता हूँ.' 

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ओपीडी पड़ताल में अलग ही हकीकत

लेकिन अस्पताल की सच्चाई कुछ और ही नजर आती है. 4 और 5 अप्रैल को अस्पताल में ओपीडी पड़ताल में अलग ही हकीकत सामने आई. शुक्रवार, 4 अप्रैल को मरीजों को ओपीडी का पर्चा डॉ उमेश प्रसाद सिंह के नाम पर कटा. लेकिन ड्यूटी पर डॉ संजय कुमार मिले. उनसे जब पूछा गया कि डॉ उमेश प्रसाद सिंह के बदले आप क्यों ओपीडी में मरीजों को देख रहे हैं तो उनका जवाब सुनकर एक और सच सामने आया. उन्होंने बताया कि आज डॉ अनिल कुमार ठाकुर को ओपीडी करना है. लेकिन वे आए नहीं हैं इसलिए उनकी जगह मैं (डॉ संजय कुमार) ओपीडी में हूँ. वहीं पर्चा पर डॉ उमेश कुमार सिंह का नाम होने से जुड़े सवाल पर उन्होंने बताया 'भावया' नामक एप पर उनका नाम पंजीकृत नहीं है. 

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पर्चा का फर्जीवाड़ा

वहीं शनिवार, 5 अप्रैल को भी यही सिलसिला बरकरार रहा.  एक बार फिर से डॉ संजय कुमार ही मिले. वहीं पर्चा फिर से डॉ उमेश कुमार सिंह के नाम से काटकर मरीजों को दिया गया. इस सम्बंध में पूछने पर डॉ संजय ने कहा कि आज सुधा कुमारी की ड्यूटी है. डॉ सुधा कुमारी ओपीडी में मरीजों को देखेंगी. लेकिन पर्चा पर डॉ उमेश कुमार सिंह का नाम होने पर उन्होंने कहा कि इस संबंध में डॉ उमेश ही बता सकते हैं जो अब सोमवार को मिलेंगे. 

ओपीडी में कभी भी मरीजों को नहीं देखते

डॉ संजय ने यह भी खुलासा किया कि डॉ उमेश कुमार सिंह तो ओपीडी में कभी भी मरीजों को देखते ही नहीं है. सिर्फ पर्चा ही उनके नाम का कटता है. मरीजों को ओपीडी में देखने का काम अन्य डॉक्टर ही करते हैं. ओपीडी का पर्चा किसी और डॉक्टर के नाम का और ड्यूटी पर कोई अन्य डॉक्टर मौजूद रहने से मरीजों में भी नाराजगी देखी गई. मरीजों का कहना है कि डॉक्टरों की उपस्थिति को लेकर कोई पारदर्शिता नहीं है. ऐसे में में बड़ा सवाल है कि जिस अस्पताल को को सर्वाधिक ओपीडी रोगियों को सेवा प्रदान करने हेतु प्रशंसा पत्र जारी होता है, वहां डॉक्टर कभी ओपीडी में बैठते ही नहीं हैं. 

कमलेश की रिपोर्ट