NEET री-एग्जाम फर्जीवाड़े पर बड़ा एक्शन, EOU के DIG पहुंचे लखीसराय, 30 आरोपियों से होगी आमने-सामने पूछताछ

NEET-UG 2026 री-एग्जाम फर्जीवाड़ा मामले की जांच अब अपने सबसे निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। EOU के डीआईजी मानवजीत सिंह ढिल्लों शुक्रवार को खुद लखीसराय पहुंचे है, जहां वे सभी 30 आरोपियों से आमने-सामने गहन पूछताछ करेंगे....

NEET री-एग्जाम फर्जीवाड़े पर बड़ा एक्शन, EOU के DIG पहुंचे ल
NEET री-एग्जाम फर्जीवाड़े पर बड़ा एक्शन- फोटो : कमलेश

Lakhisarai : बिहार में NEET-UG 2026 री-एग्जाम फर्जीवाड़ा मामले की जांच अब अपने सबसे निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) के डीआईजी मानवजीत सिंह ढिल्लों शुक्रवार को खुद लखीसराय पहुंचे, जिससे इस पूरे मामले में हड़कंप मच गया है। जिला अतिथि गृह में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक करने के बाद, डीआईजी सीधे तेतरहाट थाना के लिए रवाना हुए। यहां वे मामले की कमान संभालते हुए गिरफ्तार किए गए सभी 30 आरोपियों से आमने-सामने गहन पूछताछ करेंगे।


डमी अभ्यर्थियों से लेकर बायोमैट्रिक ऑपरेटर तक शिकंजे में

इस मामले में अब तक हुई कार्रवाई के तहत पुलिस ने एक बड़े नेटवर्क को ध्वस्त किया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए कुल 30 आरोपियों में 9 डमी (प्रॉक्सी) अभ्यर्थी, 18 बायोमैट्रिक ऑपरेटर और 2 अन्य सहयोगी शामिल हैं। डीआईजी की मौजूदगी में होने वाली इस सीधी पूछताछ से यह उम्मीद जताई जा रही है कि फर्जीवाड़े की परतें खुलेंगी और यह साफ हो सकेगा कि इस पूरे रैकेट के पीछे असली मास्टरमाइंड कौन है।


21 जून की परीक्षा में हुआ था खेल

गौरतलब है कि यह पूरा मामला बीती 21 जून 2026 को आयोजित हुई NEET-UG री-एग्जाम से जुड़ा हुआ है। परीक्षा के दौरान लखीसराय के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर बड़े पैमाने पर धांधली और अनियमितता की बात सामने आई थी। शुरुआती जांच में ही यह खुलासा हो गया था कि कई केंद्रों पर असली परीक्षार्थियों की जगह मोटी रकम लेकर डमी कैंडिडेट परीक्षा हॉल में बैठे थे। इसके अलावा, बायोमैट्रिक सत्यापन करने वाले कर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई थी।


जब्त मोबाइल और डिजिटल सबूत उगलेंगे राज

जांच को पुख्ता बनाने के लिए EOU और स्थानीय पुलिस की टीम पूरी तरह से वैज्ञानिक और डिजिटल साक्ष्यों पर निर्भर है। गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों के मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। पुलिस अब इनके कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), व्हाट्सएप चैट और बैंक खातों के लेन-देन को खंगाल रही है। अधिकारियों का मानना है कि इन डिजिटल सबूतों से इस गिरोह के अंतरराज्यीय कड़ियों का पर्दाफाश हो सकता है।


बड़े खुलासे और नई गिरफ्तारियों की उम्मीद

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार ने इसकी जांच की जिम्मेदारी आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को सौंपी है। डीआईजी मानवजीत सिंह ढिल्लों के खुद लखीसराय के तेतरहाट थाने में कैंप करने के बाद जांच की रफ्तार काफी तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले 24 से 48 घंटों के भीतर इस परीक्षा घोटाले में कई और चौंकाने वाले नाम सामने आ सकते हैं, जिसके आधार पर बिहार और अन्य राज्यों में छापेमारी कर नई गिरफ्तारियां की जा सकती हैं।


कमलेश की रिपोर्ट