मां बाला त्रिपुर सुंदरी मंदिर समिति के पुनर्गठन पर उठे सवाल, पारदर्शिता और जनभागीदारी को लेकर लोगों में नाराजगी

लोगों का सवाल है कि जब मंदिर न्यास समिति का पुनर्गठन किया जा रहा था, तो बैठक से पहले व्यापक प्रचार-प्रसार क्यों नहीं किया गया? क्या इच्छुक और योग्य लोगों को समिति में शामिल होने का अवसर दिया गया?

मां बाला त्रिपुर सुंदरी मंदिर बड़हिया
मां बाला त्रिपुर सुंदरी मंदिर बड़हिया - फोटो : news4nation

Bihar News : बिहार के प्रमुख देवी मंदिरों में शामिल बड़हिया स्थित मां बाला त्रिपुर सुंदरी मंदिर न्यास समिति के पुनर्गठन की प्रक्रिया को लेकर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि समिति के पुनर्गठन जैसे महत्वपूर्ण विषय में पारदर्शिता और व्यापक जनभागीदारी का ध्यान रखा जाना चाहिए था।


जानकारी के अनुसार, नई समिति के गठन को लेकर 1 अगस्त को जगदंबा मंदिर में बैठक आयोजित की गई थी। बैठक की सूचना अखबार के माध्यम से प्रकाशित कर लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। लेकिन डिजिटल और सोशल मीडिया के दौर में सवाल उठ रहा है कि क्या केवल अखबार में सूचना प्रकाशित करना पर्याप्त था? क्या बैठक की जानकारी मंदिर से जुड़े श्रद्धालुओं, स्थानीय लोगों और संबंधित पक्षों तक सोशल मीडिया, वेबसाइट या अन्य सार्वजनिक माध्यमों से भी पहुंचाई गई?


पुनर्गठन की प्रक्रिया पर उठे सवाल

लोगों का सवाल है कि जब मंदिर न्यास समिति का पुनर्गठन किया जा रहा था, तो बैठक से पहले व्यापक प्रचार-प्रसार क्यों नहीं किया गया? क्या इच्छुक और योग्य लोगों को समिति में शामिल होने का अवसर दिया गया? बैठक में किन-किन नामों पर चर्चा हुई और किन लोगों के नाम प्रस्तावित किए गए, इसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?


सूत्रों के हवाले से यह भी सवाल सामने आया है कि बैठक में विस्तृत चर्चा के बजाय प्रस्तावित नामों को आगे भेजने की प्रक्रिया पूरी किए जाने की बात कही जा रही है। यदि ऐसा है तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि नामों का चयन किस आधार पर हुआ और क्या प्रस्तावित सदस्यों से उनकी सहमति पहले ली गई थी?


नियम और पारदर्शिता पर भी सवाल

मंदिर न्यास समिति के गठन और पुनर्गठन की प्रक्रिया बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के अधिकार क्षेत्र और निर्धारित नियमों के तहत होती है। ऐसे में लोगों का सवाल है कि प्रस्ताव तैयार करने से लेकर अंतिम अनुमोदन तक पूरी प्रक्रिया कितनी पारदर्शी रही?  हालांकि, बैठक में नाम प्रस्तावित होना अंतिम समिति का गठन नहीं है। अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारी और धार्मिक न्यास पर्षद की प्रक्रिया के अनुसार होना है। अब लोगों की मांग है कि बैठक की कार्यवाही, प्रस्तावित सदस्यों के नाम और चयन का आधार सार्वजनिक किया जाए, ताकि श्रद्धालुओं के बीच किसी तरह की भ्रम या असंतोष की स्थिति न बने।
 

कमलेश की रिपोर्ट