कांग्रेस की बैठक बनी अखाड़ा: प्रदेश अध्यक्ष के सामने चले लात-घूंसे, झंडों के डंडों से आपस में भिड़े कार्यकर्ता

हार की समीक्षा करने पहुंचे कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के सामने ही पार्टी की गुटबाजी सड़क पर आ गई। प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और शकील अहमद खान की मौजूदगी में कार्यकर्ताओं के दो गुट आपस में भिड़ गए।

कांग्रेस की बैठक बनी अखाड़ा: प्रदेश अध्यक्ष के सामने चले लात

Madhubani - बिहार कांग्रेस में मची आंतरिक कलह शनिवार को उस समय सड़क पर आ गई, जब मधुबनी जिले में आयोजित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक रणक्षेत्र में तब्दील हो गई। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और पूर्व विधायक दल के नेता (CLP) शकील अहमद खान की मौजूदगी में ही कार्यकर्ता एक-दूसरे के खून के प्यासे हो गए। देखते ही देखते सभा स्थल पर लात-घूंसे चलने लगे और कार्यकर्ताओं ने पार्टी के झंडे लगे डंडों से ही एक-दूसरे पर हमला बोल दिया। 

हार की समीक्षा में फूटा 'टिकट बंटवारे' का गुस्सा

मिली जानकारी के अनुसार, बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार के कारणों की समीक्षा के लिए जिला स्तर पर यह बैठक बुलाई गई थी। बैठक शुरू होते ही टिकट बंटवारे में हुई कथित मनमानी और चहेतों को तरजीह देने का मुद्दा गरमा गया। नाराज कार्यकर्ताओं ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी, जिसके बाद दो गुट आमने-सामने आ गए। 

मंच से हाथ जोड़ते रहे नेता, नीचे चलता रहा दंगल

हैरानी की बात यह रही कि प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और शकील अहमद खान मंच से लगातार कार्यकर्ताओं को शांत रहने और अनुशासन बनाए रखने की अपील करते रहे। लेकिन आक्रोशित कार्यकर्ता किसी की सुनने को तैयार नहीं थे। धक्का-मुक्की से शुरू हुआ विवाद मारपीट में बदल गया, जिससे कार्यक्रम स्थल पर अफरा-तफरी मच गई और बैठक को बीच में ही रोकना पड़ा। 

डिप्टी मेयर ने दी सफाई: 'दिल्ली से हुआ था फैसला'

मामले को शांत करने की कोशिश करते हुए कांग्रेस नेता और डिप्टी मेयर अमानुल्लाह खान ने कहा कि टिकट वितरण को लेकर कुछ कार्यकर्ताओं के मन में मलाल था। उन्होंने स्वीकार किया कि नाराजगी जायज हो सकती है, लेकिन मारपीट का रास्ता गलत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि टिकट की अंतिम सूची दिल्ली स्थित आलाकमान द्वारा तय की गई थी, न कि जिला स्तर पर। 

विपक्ष को मिला बैठे-बिठाए मुद्दा

सरेआम हुई इस मारपीट के बाद कांग्रेस की गुटबाजी एक बार फिर उजागर हो गई है। जिले में चर्चा है कि जो पार्टी अपनी हार की समीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से नहीं कर सकती, वह एकजुट होकर चुनाव कैसे लड़ेगी? इस घटना के बाद विपक्षी दलों को भी कांग्रेस पर हमलावर होने का मौका मिल गया है।

Report - Abhijeet singh