सुल्तानगंज से 73 KM पाइपलाइन के जरिए सूखे खेतों तक पहुंचेगी गंगा, सीएम नीतीश के ड्रीम प्रोजेक्ट से बदलेगी तीन जिलों की सूरत

जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए एक महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजना पर तेज़ी से काम कर रही है। 1800 करोड़ रुपये की इस योजना के तहत भागलपुर के सुल्तानगंज से गंगा नदी का पानी लिफ्ट कर बांका और मुंगेर के जलाशयों तक पहुँचाया जाएगा।

सुल्तानगंज से 73 KM पाइपलाइन के जरिए सूखे खेतों तक पहुंचेगी

Munger - मुंगेर और उसके आसपास के जिलों के किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। बिहार सरकार ₹1800 करोड़ की लागत से एक ऐसी सिंचाई परियोजना पर काम कर रही है, जो इस क्षेत्र की कृषि व्यवस्था का चेहरा बदल देगी।  आइए, इस परियोजना के विभिन्न पहलुओं को समझते हैं:

गंगा नदी से जुड़ेगी किसानों की तकदीर 

इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत भागलपुर के सुल्तानगंज से गंगा का पानी 'लिफ्ट' करके पाइपलाइन के जरिए सूखे क्षेत्रों तक पहुँचाया जाएगा। यह पानी 73 किलोमीटर का सफर तय कर बांका जिले के हनुमान डैम और मुंगेर की हवेली खड़गपुर झील तक पहुँचेगा। इस कदम से भागलपुर, मुंगेर और बांका के सैकड़ों किसानों की बारिश पर निर्भरता हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। 

सूखे और जलवायु परिवर्तन का स्थायी समाधान 

वर्तमान में जलवायु परिवर्तन के कारण किसान कभी सूखे तो कभी अनियमित बारिश की मार झेलते हैं। खेतों तक समय पर पानी न पहुँचने से फसलें बर्बाद हो जाती हैं। इसी संकट को देखते हुए बिहार सरकार ने खजाने का दरवाजा खोला है, ताकि बाढ़ के समय उपलब्ध गंगा के अतिरिक्त पानी का उपयोग सिंचाई के लिए किया जा सके। 

'लिफ्ट इरिगेशन' तकनीक का कमाल


यह परियोजना अत्याधुनिक 'लिफ्ट इरिगेशन' प्रणाली पर आधारित है। इसमें भारी मशीनों के जरिए पानी को ऊंचाई पर स्थित जलाशयों तक चढ़ाया जाता है। हैदराबाद की जीबीपीआई (GBPI) इंजीनियरिंग एजेंसी इस पर तेज़ी से काम कर रही है। पाइपलाइन बिछाने का कार्य जारी है और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है। 

मुख्यमंत्री का 'ड्रीम प्रोजेक्ट' 

प्रोजेक्ट मैनेजर के अनुसार, यह मुख्यमंत्री का एक सपना है, जिसे अगले 18 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। जिस तरह नालंदा और गया जैसे जिलों में गंगा का पानी पहुँचाकर वहां की जल समस्या को हल किया गया है, ठीक उसी तर्ज पर मुंगेर और बांका को भी हरा-भरा बनाने की तैयारी है। 

साल में दो से अधिक फसलें उगा सकेंगे किसान

इस योजना के पूरा होने से किसानों के पास सिंचाई की स्थायी सुविधा होगी। स्थानीय किसानों का मानना है कि अब वे सिर्फ मानसून के भरोसे नहीं रहेंगे। पानी की उपलब्धता होने से वे साल में दो या उससे भी अधिक फसलें उगा सकेंगे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और आय में काफी इज़ाफा होगा। 

कृषि क्षेत्र के लिए 'गेम चेंजर' साबित होगी योजना

कुल मिलाकर, यह 1800 करोड़ की योजना इस क्षेत्र के लिए एक 'गेम चेंजर' साबित हो सकती है। अगर यह तय समय पर पूरी होती है, तो भागलपुर, मुंगेर और बांका के किसानों की किस्मत बदल जाएगी। यह न केवल सिंचाई की समस्या दूर करेगी, बल्कि पूरे इलाके के भूमिगत जल स्तर (Groundwater level) को सुधारने में भी मदद करेगी।