Bihar News : सुल्तानगंज EO पर हमले के विरोध में खड़गपुर नगर परिषद में हड़ताल, काला बिल्ला लगाकर कर्मियों ने जताया आक्रोश
MUNGER : जिले के सुल्तानगंज नगर परिषद में बंदोबस्ती विवाद को लेकर कार्यपालक पदाधिकारी को गोली मारे जाने की घटना ने अब पूरे प्रमंडल में प्रशासनिक विरोध का रूप ले लिया है। इस हिंसक वारदात के खिलाफ मुंगेर जिले के हवेली खड़गपुर नगर परिषद के कर्मचारियों ने बुधवार को कड़ा विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने सुबह से ही कार्यालय परिसर में एकजुट होकर इस अमानवीय कृत्य की निंदा की और अपराधियों के बढ़ते मनोबल पर गहरी चिंता जताई।
विरोध को प्रभावी बनाने के लिए नगर परिषद के सभी कर्मियों ने अपनी बांह पर काला बिल्ला बांधकर काम किया और प्रतीकात्मक रूप से विरोध दर्ज कराया। इसके साथ ही, कर्मचारियों ने 'पेन डाउन स्ट्राइक' का सहारा लेते हुए सभी आधिकारिक कार्यों को रोक दिया। इस हड़ताल के कारण नगर परिषद कार्यालय में आने वाले आम लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन कर्मचारियों का स्पष्ट कहना था कि वे अपनी जान जोखिम में डालकर काम नहीं कर सकते।
सुल्तानगंज की घटना ने नगर निकाय के अधिकारियों के बीच भारी असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है। हवेली खड़गपुर के कर्मियों ने बताया कि बंदोबस्ती और अतिक्रमण जैसे संवेदनशील मामलों में अक्सर अधिकारियों को अपराधियों के कोपभाजन का शिकार होना पड़ता है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि ऐसे मामलों में ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को पर्याप्त पुलिस बल और व्यक्तिगत सुरक्षा मुहैया कराई जाए, ताकि वे बिना किसी डर के अपना कर्तव्य निभा सकें।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने सरकार और प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। सुल्तानगंज मामले में शामिल अपराधियों की अविलंब गिरफ्तारी होनी चाहिए और उन्हें फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए सख्त सजा मिलनी चाहिए। कर्मचारियों ने साफ किया कि अगर 24 घंटे के भीतर कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखी, तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने और सेवाओं को पूरी तरह बाधित करने के लिए बाध्य होंगे।
इस घटना के बाद अब पूरे राज्य के नगर निकाय संगठनों में उबाल देखा जा रहा है। मुंगेर प्रमंडल के विभिन्न जिलों में इस तरह के विरोध प्रदर्शन की खबरें आ रही हैं। हवेली खड़गपुर नगर परिषद के इस कदम ने शासन-प्रशासन के सामने सुरक्षा के मुद्दे को प्राथमिकता पर ला दिया है। अब देखना होगा कि सरकार इन मांगों पर क्या संज्ञान लेती है और ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों की सुरक्षा के लिए क्या नए मानक तय किए जाते हैं।
इम्तियाज़ की रिपोर्ट