कांटी को कचरा यार्ड नहीं बनने देंगे: पूर्व मंत्री अजीत कुमार ने भरी हुंकार, प्रशासन को दी 'आर-पार' की चेतावनी
पूर्व मंत्री सह स्थानीय विधायक अजीत कुमार व आसपास के ग्रामीणों ने शहर से 30 किलोमीटर दूर गांव में कचरा डंपिंग यार्ड बनाने की योजना पर कड़ी नाराजगी जताई है।
मुजफ्फरपुर जिले के कांटी विधानसभा अंतर्गत बहुआरा पंचायत के यशोदमठ में प्रशासन द्वारा कचरा डंपिंग यार्ड बनाने की योजना का पुरजोर विरोध शुरू हो गया है। पूर्व मंत्री सह स्थानीय विधायक अजीत कुमार ने ग्रामीणों के साथ बैठक कर स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी कीमत पर कांटी को शहर का 'कचरा यार्ड' नहीं बनने दिया जाएगा। विधायक ने जिला प्रशासन के इस निर्णय को क्षेत्र की जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ बताया और आर-पार की लड़ाई का एलान किया।
रौतनिया का हवाला: गंदगी और बदबू से पहले ही बेहाल है जनता
बैठक को संबोधित करते हुए अजीत कुमार ने कहा कि कांटी के रौतनिया में पहले से ही कचरा डंपिंग यार्ड मौजूद है, जिसकी वजह से हजारों की आबादी गंदगी और असहनीय बदबू के बीच जीने को मजबूर है। उन्होंने जिलाधिकारी को उनके पुराने वादे की याद दिलाते हुए मांग की कि रौतनिया को शीघ्र कचरा मुक्त कराया जाए, न कि क्षेत्र में एक और नया डंपिंग यार्ड थोपा जाए। विधायक ने कहा, "कांटी की जनता पहले से ही थर्मल पावर प्लांट का प्रदूषण झेल रही है, अब और कचरा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"
संसाधनों के दोहन पर नाराजगी: बैरिया बस स्टैंड का उठा मुद्दा
विधायक ने प्रशासन पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि कांटी क्षेत्र में स्थित बैरिया बस स्टैंड से बड़ी आय प्राप्त होती है, लेकिन उस राशि को कांटी के विकास में खर्च करने के बजाय अन्य जगहों पर इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि क्षेत्र के संसाधनों का इस्तेमाल तो हो रहा है, लेकिन बदले में जनता को सिर्फ कचरा और प्रदूषण दिया जा रहा है। ग्रामीणों ने भी एक स्वर में इस पक्षपातपूर्ण रवैये का विरोध किया।
यशोदमठ में जुटी भारी भीड़, प्रशासन के खिलाफ बनी रणनीति
विदित हो कि जिला प्रशासन ने यशोदमठ में कचरा डंपिंग यार्ड के लिए जमीन चिन्हित की है, जिसके बाद से ही ग्रामीणों का आक्रोश चरम पर है। बैठक में जिला पार्षद आभा ठाकुर समेत शत्रुघ्न सिंह, अखिलेश पाण्डेय और दर्जनों प्रमुख ग्रामीण मौजूद थे। सभी ने एकजुट होकर मांग की कि डंपिंग यार्ड को आबादी वाले क्षेत्र से दूर किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाए। बैठक के अंत में चेतावनी दी गई कि यदि प्रशासन ने अपना फैसला वापस नहीं लिया, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
रिपोर्ट - नरोत्तम कुमार