Bihar News : मुजफ्फरपुर में आधार केंद्र के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा, अवैध उगाही और फर्जी आईडी संचालन का मामला आया सामने
Bihar News : मुजफ्फरपुर में आधार केंद्र के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा हो रहा है. जहाँ गलत तरीके से लोगों का फर्जी आधार कार्ड बनाया जा रहा है.....पढ़िए आगे
MUZAFFARPUR : बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में आधार केंद्र के नाम पर एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां नियम को ताक पर रखकर अवैध तरीके से आधार सेंटर चलाने और लोगों से लाखों रुपये वसूलने का सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है। पारू प्रखंड के रहने वाले एक पीड़ित युवक राजू कुमार ने इस संबंध में मुजफ्फरपुर के साइबर थाने की पुलिस को एक लिखित आवेदन सौंपा है, जिसके बाद पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।
क्या है पूरा मामला और पीड़ित का आरोप?
साइबर थाने को दिए गए आवेदन के अनुसार, पीड़ित राजू कुमार से आधार केंद्र काउंटर के नाम पर एक बिचौलिए के जरिए 4 लाख 60 हजार रुपये की अवैध रकम वसूली गई। इसके बाद उनकी दो आईडी एक्टिवेट तो कर दी गईं, लेकिन कुछ ही दिनों बाद उन्हें फिर से बंद कर दिया गया।
आईडी बंद और चालू होने का खेल
जब पीड़ित ने इसकी शिकायत कंपनी के वरीय अधिकारियों से की, तो उनकी आईडी दोबारा खोल दी गई। इसके बाद आईडी चलाने की एवज में फिर से अवैध रूप से पैसों की मांग की जाने लगी। जब पीड़ित ने और पैसे देने से मना कर दिया, तो उनकी आईडी हमेशा के लिए ब्लॉक कर दी गई।
प्रखंड कार्यालय के बजाय दूसरी जगहों पर संचालन
पीड़ित का मुख्य आरोप है कि नियमों के मुताबिक आधार केंद्र को संबंधित प्रखंड परिसर के अंदर चलना चाहिए, लेकिन ये लोग सेंटर को अन्य जगहों पर गुप्त रूप से संचालित कर रहे हैं। वहां भारी मात्रा में अवैध पैसे लेकर फर्जी कागजातों के आधार पर फर्जी आधार कार्ड बनाए जा रहे हैं।
आधार केंद्र संचालन का असली नियम क्या है?
सरकारी नियमों के अनुसार, देश या राज्य के विभिन्न प्रखंड कार्यालयों में आधार केंद्र चलाने का टेंडर सरकार द्वारा किसी विशेष अधिकृत कंपनी को दिया जाता है। नियम के तहत आधार केंद्र का संचालन अनिवार्य रूप से संबंधित प्रखंड कार्यालय परिसर के भीतर ही किया जाना चाहिए। इसका मुख्य और एकमात्र उद्देश्य नागरिकों के आधार कार्ड से जुड़े सुधार (जैसे नाम, पता, बायोमेट्रिक अपडेट आदि) और नए आधार से जुड़े अधिकृत कार्य करना है।
जालसाज उठा रहे फायदा
कई बार टेंडर लेने वाली कंपनियां अलग-अलग जिलों में सब-लीज या अन्य लोगों को यह काम सौंप देती हैं। इसी का फायदा उठाकर जालसाज पहले आईडी एक्टिवेट करने के नाम पर भारी रकम वसूलते हैं और फिर लागत निकालने के लिए प्रखंड परिसर से बाहर अवैध स्थानों पर सेंटर चलाकर फर्जीवाड़े को अंजाम देते हैं।
मणिभूषण की रिपोर्ट