Bihar Rain: कुछ घंटों की बारिश में डूबा स्मार्ट सिटी का सपना, मुजफ्फरपुर की सड़कें बनीं झील, नगर निगम के दावों की खुली कलई

Bihar Rain: पहली ही बारिश में शहर की कई प्रमुख सड़कें जलमग्न हो गईं और हालात ऐसे बन गए कि सड़कें कम, झील ज़्यादा नज़र आने लगीं।....

Muzaffarpur Smart City Dream Roads Turn to Lakes
कुछ घंटों की बारिश में डूबा स्मार्ट सिटी का सपना- फोटो : reporter

Bihar Rain: मुजफ्फरपुर में महज़ कुछ घंटों की बारिश ने स्मार्ट सिटी परियोजना और नगर निगम के दावों की हक़ीकत सामने ला दी। पहली ही बारिश में शहर की कई प्रमुख सड़कें जलमग्न हो गईं और हालात ऐसे बन गए कि सड़कें कम, झील ज़्यादा नज़र आने लगीं। जिस शहर को आधुनिक सुविधाओं और बेहतर ड्रेनेज सिस्टम का मॉडल बताया जा रहा था, वहीं अब लोगों को घुटनों तक पानी में जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है।

हर साल मानसून से पहले नगर निगम करोड़ों रुपये खर्च कर सड़कों की मरम्मत, नालों की उड़ाही और जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त करने का दावा करता है। अधिकारियों की ओर से भरोसा दिया जाता है कि बारिश में शहरवासियों को जलजमाव की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। लेकिन इस बार भी चंद घंटों की बारिश ने इन तमाम दावों की कलई खोल दी। पहली बारिश में ही शहर की मुख्य सड़कें पानी में डूब गईं और नगर निगम की तैयारियों पर बड़े सवाल खड़े हो गए।

सबसे खराब स्थिति अघोरिया बाजार से आमगोला रोड जाने वाली मुख्य सड़क की रही, जहां कई फीट तक पानी जमा हो गया। हालात ऐसे हैं कि लोगों को सड़क पर उतरने से पहले कई बार सोचना पड़ रहा है। दोपहिया और चारपहिया वाहन रेंगते नजर आए, जबकि राहगीरों को पानी में रास्ता तलाशकर गुजरना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर कुछ घंटों की बारिश में शहर का यह हाल है, तो लगातार मूसलाधार बारिश होने पर पूरा मुजफ्फरपुर जलमग्न हो जाएगा।

शहरवासियों में नगर निगम और स्मार्ट सिटी परियोजना को लेकर गहरी नाराज़गी है। लोगों का कहना है कि स्मार्ट सिटी बनने की घोषणा के बाद उम्मीद जगी थी कि जलजमाव, टूटी सड़कें और बदहाल ड्रेनेज जैसी पुरानी समस्याओं से राहत मिलेगी। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। उनका आरोप है कि स्मार्ट सिटी के नाम पर सिर्फ योजनाओं का शोर मचाया गया, जबकि आम नागरिक आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि हर साल नाला सफाई और सड़क मरम्मत के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होने का दावा किया जाता है, लेकिन बारिश आते ही व्यवस्थाओं की पोल खुल जाती है। उनका कहना है कि नालों की सफाई केवल कागज़ों तक सीमित रह जाती है और वास्तविक काम खानापूर्ति से आगे नहीं बढ़ता। यही वजह है कि हर मानसून में मुजफ्फरपुर के लोग जलजमाव, ट्रैफिक जाम और बदहाल सड़कों की मार झेलने को मजबूर हैं। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब पहली ही बारिश में स्मार्ट सिटी की तस्वीर इतनी बदहाल है, तो पूरे मानसून में शहर का क्या हाल होगा?

रिपोर्ट- मणिभूषण शर्मा