भरत तिवारी एनकाउंटर पर नवादा में उबाल: 'सम्राट चौधरी मुर्दाबाद' के नारों से गूंजा शहर, निकाला गया विशाल कैंडल मार्च

भोजपुर में हुए सामाजिक कार्यकर्ता भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर के खिलाफ नवादा में भारी जन-आक्रोश देखने को मिला। सैकड़ों युवाओं ने नगर थाना से भगत सिंह चौक तक कैंडल मार्च निकालकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पुलिस प्रशासन के खिलाफ 'मुर्दाबाद' के नारे लगाए

भरत तिवारी एनकाउंटर पर नवादा में उबाल: 'सम्राट चौधरी मुर्दाब
भरत तिवारी एनकाउंटर पर नवादा में उबाल- फोटो : अमन सिन्हा

Nawada : युवा सामाजिक कार्यकर्ता भरत भूषण तिवारी की कथित पुलिस एनकाउंटर में हुई मौत की आग अब पूरे बिहार में फैलने लगी है। इस घटना के विरोध में नवादा जिले में सैकड़ों युवाओं और स्थानीय नागरिकों ने सड़कों पर उतरकर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने नगर थाना के समीप से एक विशाल कैंडल मार्च निकाला, जो शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए भगत सिंह चौक पर जाकर समाप्त हुआ। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने बिहार सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।


'न्याय दो भरत को' और 'भ्रष्टाचार मुर्दाबाद' के लगे नारे; बैनर-पोस्टर के साथ उतरे युवा

कैंडल मार्च के दौरान युवाओं का एक बहुत बड़ा समूह हाथों में बैनर और मोमबत्तियां लेकर चल रहा था। प्रदर्शनकारियों का गुस्सा विशेष रूप से बिहार के मुख्यमंत्री पर फूटा। मार्च में शामिल लोग "सम्राट चौधरी मुर्दाबाद" के नारे लगा रहे थे। इसके साथ ही पूरी सड़क "न्याय दो भरत तिवारी को न्याय दो" और "भ्रष्टाचार मुर्दाबाद" जैसे गगनभेदी नारों से गूंजती रही। युवाओं ने साफ कहा कि इस लड़ाई को तब तक बंद नहीं किया जाएगा, जब तक कि इस खूनी वारदात की असली हकीकत सबके सामने नहीं आ जाती।


सिस्टम की खामियों के खिलाफ आवाज उठाने की मिली सजा, परिजनों के सरेंडर के दावे पर अड़े लोग

प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने पुलिसिया कार्रवाई पर कई गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि भरत तिवारी इलाके में व्याप्त भ्रष्टाचार और सरकारी सिस्टम की खामियों के खिलाफ लगातार मुखर होकर आवाज उठा रहे थे। इसी से परेशान होकर व्यवस्था की नाकामी को छिपाने के लिए उन्हें साजिश के तहत जानबूझकर गोली मार दी गई। समर्थकों और परिजनों के उस दावे को युवाओं ने दोहराया, जिसमें कहा गया था कि भरत ने पुलिस के सामने पूरी तरह आत्मसमर्पण (सरेंडर) कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई गईं। युवाओं ने इसे पूरी तरह एक सुनियोजित 'फर्जी एनकाउंटर' करार दिया।


न्यायिक जांच के आदेश के बाद भी कम नहीं हो रहा आक्रोश; पूरे बिहार में प्रदर्शन तेज

गौरतलब है कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा पहले ही उच्चस्तरीय न्यायिक जांच के आदेश दिए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद जनता और युवाओं का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। कैंडल मार्च में शामिल लोगों ने मांग की कि मामले की जांच पूरी तरह निष्पक्ष होनी चाहिए और हत्या में शामिल दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई कर उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए। भरत तिवारी की मौत के बाद नवादा ही नहीं, बल्कि बिहार के कई अन्य जिलों में भी इसी तरह के उग्र विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं, जो राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर युवाओं के बढ़ते आक्रोश को साफ दर्शाता है।


अमन सिन्हा की रिपोर्ट