Election Commission Rule : बांकीपुर उपचुनाव में 23 प्रत्याशियों की नहीं बची जमानत, जानिए क्या है जमानत राशि और कब होती है ज़ब्त

Election Commission Rule : चुनावी प्रक्रिया में गैर-गंभीर प्रत्याशियों की संख्या को सीमित करने के उद्देश्य से चुनाव आयोग उम्मीदवारों से एक तय रकम जमा कराता है। जिसे जानिए कब जब्त किया जाता है.....पढ़िए आगे

Election Commission Rule :  बांकीपुर उपचुनाव में 23 प्रत्याश
कब जब्त होती है जमानत - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजों की घोषणा के साथ ही क्षेत्र का राजनीतिक परिदृश्य साफ हो गया है। इस चुनाव में कुल 25 प्रत्याशियों ने अपनी चुनावी किस्मत आजमाई थी, जिनमें से 23 उम्मीदवार अपनी जमानत बचाने में पूरी तरह असफल रहे। चौंकाने वाली बात यह रही कि मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की उम्मीदवार रेखा कुमारी भी तय न्यूनतम वोट हासिल न कर पाने के कारण अपनी जमानत नहीं बचा सकीं।

दरअसल, हर स्तर के चुनाव में गैर-गंभीर उम्मीदवारों की भागीदारी को नियंत्रित करने के लिए चुनाव आयोग नामांकन के समय एक निश्चित राशि जमा करवाता है, जिसे 'जमानत राशि' कहा जाता है। पंचायत स्तर से लेकर देश के राष्ट्रपति चुनाव तक हर प्रत्याशी को यह राशि जमा करनी अनिवार्य होती है। यदि कोई उम्मीदवार चुनाव में एक तय सीमा तक वोट पाने में असमर्थ रहता है, तो उसकी यह जमा पूंजी सरकारी खजाने में जब्त कर ली जाती है।

विभिन्न चुनावों में उम्मीदवारों के वर्ग के आधार पर अलग-अलग जमानत राशि का प्रावधान है। 'जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' के अनुसार, विधानसभा चुनाव में सामान्य वर्ग के लिए ₹10,000 और SC/ST वर्ग के लिए ₹5,000 तय हैं, जबकि लोकसभा में यह राशि क्रमशः ₹25,000 और ₹12,500 है। वहीं, 'राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति निर्वाचन अधिनियम, 1952' के तहत इन शीर्ष पदों के लिए सभी वर्गों के प्रत्याशियों के लिए ₹15,000 की राशि निर्धारित की गई है।

चुनाव आयोग के नियमानुसार, किसी प्रत्याशी को अपनी जमानत राशि बचाने के लिए क्षेत्र में पड़े कुल वैध मतों का कम से कम 1/6 भाग यानी 16.66% वोट प्राप्त करना आवश्यक होता है। यही 16.66% का नियम राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनावों पर भी समान रूप से लागू होता है। 1/6 से अधिक वोट पाने वाले सभी उम्मीदवारों की जमानत राशि मतगणना के पश्चात चुनाव आयोग द्वारा वापस लौटा दी जाती है।

हालाँकि, चुनावी नियमों में उम्मीदवारों को राहत देने वाले कुछ विशेष प्रावधान भी शामिल हैं। विजयी घोषित होने वाले उम्मीदवार की जमानत राशि स्वतः वापस कर दी जाती है, चाहे उसे कुल वोटों का 16.66% मिला हो या उससे कम। इसके अतिरिक्त, नामांकन रद्द होने, नाम वापस लेने या मतदान शुरू होने से पहले किसी प्रत्याशी का निधन हो जाने की स्थिति में भी यह राशि उम्मीदवार अथवा उसके वैधानिक परिजनों को लौटा दी जाती है।