सावन में बिहार की नदियों का सूखा हाल, 26 नदियां सूखी, नालंदा में 8 का पानी गायब, 38 फीसदी कम बारिश ने बढ़ाई चिंता

Bihar Rivers: सावन का महीना चल रहा है, लेकिन बिहार की कई नदियों का हाल सूखे की मार झेल रहे इलाकों जैसा है। ....

26 Bihar Rivers Dry in Sawan as Rainfall Deficit Hits 38 Per
सावन में बिहार की नदियों का सूखा हाल- फोटो : social Media

Bihar Rivers: सावन का महीना चल रहा है, लेकिन बिहार की कई नदियों का हाल सूखे की मार झेल रहे इलाकों जैसा है। राज्य की 26 नदियों में या तो पानी पूरी तरह सूख चुका है या फिर इतना कम है कि उसकी मापी तक संभव नहीं। सबसे ज्यादा खराब स्थिति दक्षिण बिहार की है। नालंदा में अकेले आठ नदियां पूरी तरह सूखी पड़ी हैं। ऐसे में अगर बारिश का सिलसिला नहीं बढ़ा तो इन नदियों में इस साल पानी लौटेगा या नहीं, इसको लेकर संशय गहराता जा रहा है। जल संसाधन विभाग राज्य की 81 नदियों के जलस्तर की निगरानी करता है। इसके लिए 117 स्थानों पर रेनगेज लगाए गए हैं। बुधवार की रिपोर्ट के मुताबिक 26 प्रभावित नदियों में 16 में मापी लायक पानी नहीं है, जबकि 10 नदियां पूरी तरह सूख चुकी हैं।

उत्तर से ज्यादा दक्षिण बिहार बेहाल

पश्चिम चंपारण की पंडई, समस्तीपुर की नून, नून बथाने और बालान, सीतामढ़ी की लखनदेई, दरभंगा की तीषभवारा/कमला और जीवछ/कमला, अररिया की नूना, रोहतास की अवसाने और काव, औरंगाबाद की बटाने, जमुई की बरनार, नवादा की सकरी और तिलैया, मुंगेर की मुहानी तथा बांका की चिरगेरूआ नदी में पानी रेनगेज की माप सीमा से नीचे है। पटना में दरधा और कररूआ का हाल भी चिंताजनक है। वहीं नालंदा की लौकाईन, मोहाने, नोनई, पंचाने, गोइठवा, पैमार, चिरैया और भूतही पूरी तरह सूखी हुई हैं।

खेती से लेकर पशुपालन तक संकट

नदियों के सूखने का सीधा असर खेती-किसानी पर पड़ रहा है। धान की रोपनी प्रभावित है और किसानों को बिजली या डीजल पंप से सिंचाई करनी पड़ रही है। पशुओं के लिए चारे और पानी का संकट बढ़ रहा है। हरे चारे की कमी का असर दूध उत्पादन पर भी पड़ रहा है। राज्य में अब तक 38 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। इसका असर भूजल पर भी दिखाई दे रहा है। गया में पिछले साल के मुकाबले इस बार जलस्तर और नीचे चला गया है। शेरघाटी, औरंगाबाद, अरवल, सासाराम, भागलपुर, बांका, पटना, आरा और बक्सर समेत कई इलाकों में भूजल स्तर में गिरावट दर्ज की गई है।

नेपाल की नदियां उफान पर, बिहार की नदियां सूखी

इस संकट का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि जहां बिहार की कई स्थानीय नदियां पानी के लिए तरस रही हैं, वहीं नेपाल से आने वाली नदियां उफान पर हैं। कोसी में बराह क्षेत्र में करीब 1.85 लाख क्यूसेक और बीरपुर बराज में 2.55 लाख क्यूसेक तक पानी पहुंचा। वाल्मीकिनगर में गंडक का डिस्चार्ज करीब 2.24 लाख क्यूसेक तक पहुंचा। बागमती, अधवारा समूह, कोसी और गंडक का पानी राज्य के आठ स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है।

आखिर क्यों सूख रही हैं नदियां?

कम और असमय बारिश इसका बड़ा कारण है, लेकिन संकट सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं है। नदियों के किनारे बढ़ते अतिक्रमण ने उनका प्राकृतिक पाट सिकोड़ दिया है। भू-गर्भ जल का लगातार दोहन और सिंचाई में पानी का अत्यधिक इस्तेमाल भी स्थिति को गंभीर बना रहा है।जरूरत अब सिर्फ बारिश का इंतजार करने की नहीं, बल्कि नदियों के संरक्षण की ठोस कार्ययोजना बनाने की है। अतिक्रमण हटाना, भूजल दोहन पर नियंत्रण, जल संरक्षण और सिंचाई के वैकल्पिक उपायों पर काम करना होगा। वरना सावन में सूखी नदियों की तस्वीर आने वाले वर्षों में बिहार के जल संकट की और भयावह कहानी कह सकती है।