Bihar News : बिहार में महिला सुरक्षा को लेकर बड़ी पहल, जल्द कार्यशील होंगे 6 नए वन स्टॉप सेंटर, कुल संख्या बढ़कर होगी 65
Bihar News : राज्य के विभिन्न हिस्सों में 6 नए वन स्टॉप सेंटर निर्माणाधीन हैं, जिन्हें जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। इनके शुरू होते ही कुल वन स्टॉप सेंटरों की संख्या बढ़कर 65 हो जाएगी....पढ़िए आगे
PATNA : किसी भी प्रकार की हिंसा से पीड़ित महिलाओं को त्वरित, समेकित एवं प्रभावी सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य सरकार वन स्टॉप सेंटर का संचालन कर रही है। महिला एवं बाल विकास निगम, समाज कल्याण विभाग के माध्यम से राज्यभर में 6 नए वन स्टॉप सेंटर निर्माणाधीन है, जिसे जल्द पूरा कर लिया जाएगा। इसके साथ ही राज्य में संचालित कुल वन स्टॉप सेंटर की संख्या 65 हो जाएगी। वर्तमान में 59 वन स्टॉप सेंटर संचालित हैं। प्रत्येक केंद्र में 13 प्रशिक्षित कर्मियों की टीम मौजूद है, जो पीड़िता को आश्रय, चिकित्सकीय सहायता, भोजन, कपड़े, मनो-सामाजिक व कानूनी परामर्श समेत अन्य आवश्यक सहयोग उपलब्ध करा रहें हैं। जानकारी के अनुसार, नए केंद्रों को जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर अनुमंडल मुख्यालयों पर स्थापित किया जा रहा है, ताकि दूर-दराज एवं ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं भी आसानी से इसका लाभ ले सकें।
तीन वर्षों में 21 हजार से अधिक मामलों का निपटारा
पिछले तीन वर्षों में इन केन्द्रों पर कुल 25 हजार 804 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 21 हजार से अधिक मामलों को निपटा लिया गया है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में 7,517 मामलों में से 6,599, वर्ष 2024-25 में 8,888 मामलों में से 7,185 तथा वित्तीय वर्ष 2025-26 में 8,494 मामलों में से 7,440 मामलों का निपटारा किया गया है। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 में अप्रैल महीने तक 905 में से 623 मामलों का निपटारा किया गया है। पीड़िता मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर 181 पर फोन कर सकती हैं। इसके साथ ही त्वरित सहायता के लिए वन स्टॉप केन्द्रों को इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम 112 से भी जोड़ा गया है।
महिलाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण एवं आत्मनिर्भरता की पहल
इन केन्द्रों पर पीड़ित महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए कौशल प्रशिक्षण योजनाओं से भी जोड़ा गया है। महिला एवं बाल विकास निगम से बिहार स्किल डेवलपमेंट मिशन के अंतर्गत संचालित विभिन्न रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के माध्यम से पीड़ित महिलाओं को प्रशिक्षित कर रही है। इससे महिलाओं को आजीविका के बेहतर अवसर उपलब्ध हो रहे है।
वन स्टॉप सेंटर: संरक्षण और पुनर्वास का केंद्र
वन स्टॉप सेंटर हिंसा से पीड़ित महिलाओं के लिए एक समेकित सहायता तंत्र के रूप में उभरकर सामने आया है, जहां उन्हें विभिन्न सेवाओं के लिए अलग-अलग स्थानों पर भटकना नहीं पड़ता। परामर्श के माध्यम से समस्या का समाधान न होने की स्थिति में विभिन्न हितधारकों के साथ समन्वय स्थापित कर पीड़िता को राहत प्रदान की जाती है। समस्या के समाधान के पश्चात कम से कम छह माह तक पीड़िता की स्थिति की सतत निगरानी की जाती है, ताकि दोबारा हिंसा की स्थिति उत्पन्न न हो। इसके अतिरिक्त केंद्र कर्मियों के माध्यम से पीड़िता के घर जाकर भी स्थिति का अवलोकन किया जाता है। जिले में वन स्टॉप सेंटर के कार्यों की समीक्षा जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जिला संचालन समिति की बैठकों में की जाती है, जिसमें जिला पुलिस अधीक्षक सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी सदस्य के रूप में भाग लेते हैं। महिला एवं बाल विकास निगम की ओर से साप्ताहिक स्तर पर केंद्रों की समीक्षा की जाती है।