अंधेर नगरी, भ्रष्ट अधिकारी और हाईकोर्ट के आदेशों की सरेआम 'सुपारी": पटना पुलिस का गोपनीय पत्र चीख रहा!
हाईकोर्ट के आदेश का मखौल जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो दीघा और राजीव नगर जैसे इलाकों में अवैध निर्माण का रुकना नामुमकिन है।
पटना पुलिस के विधि व्यवस्था एसडीपीओ-2 द्वारा बिहार राज्य आवास बोर्ड के प्रबंध निदेशक को लिखे गए एक गोपनीय पत्र ने विभाग में खलबली मचा दी है। इस पत्र (ज्ञापांक सं-6051, दिनांक 13.10.25) में पटना के राजीव नगर और दीघा थाना क्षेत्रों में हो रहे अवैध निर्माणों का कच्चा चिट्ठा खोला गया है। पत्र में स्पष्ट रूप से आवास बोर्ड के वर्तमान एसडीओ सत्य सचिन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं और अवैध निर्माण को रोकने में विफलता का उल्लेख किया गया है।
भू-माफियाओं और अधिकारियों की कथित मिलीभगत
समाचार के अनुसार, एसडीपीओ-2 के पत्र में आवास बोर्ड के एसडीओ और भू-माफियाओं के बीच 'मिलीभगत' के स्पष्ट संकेत दिए गए हैं। आरोप है कि साक्ष्य के तौर पर अवैध निर्माण के फोटो और वीडियो उपलब्ध कराए जाने के बावजूद संबंधित अधिकारी द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह स्थिति दर्शाती है कि किस प्रकार सरकारी तंत्र के भीतर बैठे लोग ही कथित तौर पर भू-माफियाओं को संरक्षण दे रहे हैं, जिससे अवैध कब्जा और निर्माण का खेल धड़ल्ले से चल रहा है।
हाईकोर्ट के आदेशों की सरेआम अवहेलना
रिपोर्ट में इस बात पर चिंता जताई गई है कि पटना उच्च न्यायालय द्वारा आवास बोर्ड की अधिग्रहित भूमि पर निर्माण कार्यों पर लगाए गए प्रतिबंध के बावजूद निर्माण जारी है। दीघा-आशियाना रोड जैसे व्यस्ततम इलाकों में दिनदहाड़े नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यह न केवल कानूनी अवमानना है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि आवास बोर्ड का प्रवर्तन दस्ता (हथौड़ा) इन अवैध ढांचों पर चलने में पूरी तरह विफल रहा है।
तबादले के बावजूद पद पर बने रहने का विवाद
इस मामले में एक और चौंकाने वाला पहलू 'एसडीओ सत्य सचिन' के तबादले से जुड़ा है। अक्टूबर में पत्र लिखे जाने के बाद जनवरी 2026 के प्रथम सप्ताह में उनका तबादला कर दिया गया और प्रकाश चंद्र राजू को नया प्रभार सौंपा गया। हालांकि, रिपोर्ट का दावा है कि सत्य सचिन प्रभार छोड़ने को तैयार नहीं हैं और वर्तमान में कोई भी अधिकारी प्रभार में नहीं होने के कारण पिछले तीन दिनों से अवैध निर्माण का कार्य और तेज हो गया है। चर्चा है कि भू-माफिया इस तबादले को रुकवाने का दावा कर रहे हैं।
पुलिस और आवास बोर्ड के बीच समन्वय की कमी
रिपोर्ट के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि पटना पुलिस और आवास बोर्ड के बीच समन्वय का भारी अभाव है। पुलिस का तर्क है कि उनके पास जमीन के स्वामित्व के दस्तावेज नहीं होते हैं, इसलिए जब तक आवास बोर्ड के एसडीओ की मुहर नहीं लगती, वे कार्रवाई नहीं कर सकते। इसी प्रशासनिक पेच का फायदा उठाकर माफिया दीघा, आशियाना रोड और घुड़दौड़ रोड जैसे प्रमुख क्षेत्रों में अवैध रूप से प्लॉटिंग और निर्माण कर रहे हैं।
भविष्य की कार्रवाई पर उठते सवाल
अंततः, यह मामला प्रशासनिक शुचिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। 21 अक्टूबर 2025 को एमडी के पास शिकायत पहुँचने और जनवरी में तबादले के बावजूद प्रभावी कार्रवाई का न होना कई संदेहास्पद संकेत देता है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बिहार राज्य आवास बोर्ड के उच्च अधिकारी इस 'IPS की चिट्ठी' पर संज्ञान लेते हुए क्या वाकई कोई ठोस कदम उठाएंगे या यह अवैध निर्माण का सिलसिला बदस्तूर जारी रहेगा।