क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी के लिए बिहार विधान परिषद में उठी बड़ी मांग, पंचायत व्यवस्था के सवाल पर घिरी नीतीश सरकार

Bihar Legislative Council
Bihar Legislative Council - फोटो : news4nation

बिहार विधान परिषद में प्रश्नकाल के दौरान सोमवार को सदन में खेल सम्मान से लेकर पंचायत व्यवस्था, वार्ड सदस्यों के अधिकार, सोलर लाइट और मनरेगा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे क्रमवार रूप से उठाए गए। परिषद की कार्यवाही की शुरुआत युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी को बधाई देने से हुई। सभापति ने वैभव सूर्यवंशी को उनकी उपलब्धि के लिए शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा उन्हें सम्मानित किए जाने पर सदन ने मुख्यमंत्री को भी बधाई दी। इस दौरान आरजेडी एमएलसी सुनील कुमार सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से वैभव सूर्यवंशी को 50 लाख रुपये नहीं बल्कि 1 करोड़ रुपये की सम्मान राशि दी जानी चाहिए थी।


पंचायत में वार्ड सदस्य को प्रशासनिक खर्च का अधिकार देने की मांग

इसके बाद पंचायत व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा उठा। आरजेडी एमएलसी सौरभ कुमार ने कहा कि पंचायतों में वार्ड सदस्यों को अब तक किसी भी प्रकार का प्रशासनिक खर्च करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने मांग की कि पंचायत विकास के लिए वार्ड सदस्यों को कम से कम 5 लाख रुपये खर्च करने का अधिकार दिया जाए। सदन में यह भी कहा गया कि वर्तमान में मुखिया को 10 लाख रुपये तक खर्च करने का अधिकार है। इस पर सच्चिदानंद राय ने आरोप लगाया कि मुखिया अक्सर वहीं काम कराते हैं, जहां उन्हें वोट मिलता है। भाजपा एमएलसी सतीश सिंह ने भी वार्ड सदस्यों को अधिकार दिए जाने की मांग का समर्थन किया।


मंत्री श्रवण कुमार का जवाब, विपक्ष का विरोध

पंचायती राज मंत्री श्रवण कुमार ने जवाब में कहा कि पंचायत बैठकों में वार्ड सदस्य भी मौजूद रहते हैं। मंत्री के इस जवाब से असंतुष्ट होकर विपक्ष के सदस्य खड़े हो गए और विरोध जताया।मंत्री ने कहा कि यदि कहीं मुखिया पारदर्शिता नहीं रखते हैं तो इसकी जांच कराई जाएगी। राज्यभर में मुखिया के कार्यों की समीक्षा की जाएगी और आने वाले दिनों में नियमावली में बदलाव किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो केंद्र सरकार को पत्र भी लिखा जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ग्राम पंचायत में आने वाली राशि पर पंचायती राज विभाग की निगरानी रहती है, जबकि मनरेगा की राशि केंद्र सरकार से जुड़ी होती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि हर वार्ड में विकास कार्य हो और उसके लिए राशि मिले, इसकी कोशिश की जाएगी।


सोलर लाइट को लेकर अधिकार और गुणवत्ता पर सवाल

एमएलसी महेश्वर सिंह ने सवाल उठाया कि गांवों में सोलर लाइट लगाने के लिए पटना से लाइट खरीदकर भेजी जाती है, जबकि मुखिया को इसे खरीदने का अधिकार क्यों नहीं दिया जाता। उन्होंने मुखिया और वार्ड सदस्य—दोनों को अधिकार देने की मांग की। पंचायती राज विभाग की ओर से दीपक प्रकाश ने कहा कि विकास कार्य कहां होना है, इसका फैसला बैठक में होता है। नियमों में कोई बड़ी दिक्कत नहीं है, लेकिन व्यावहारिक स्तर पर समस्याएं हैं। उन्होंने कहा कि वार्ड सदस्यों को हर बैठक में शामिल होना चाहिए और विभाग पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा।


सोलर लाइट के स्टैंडर्ड को लेकर भी सवाल उठा। सभापति ने कहा कि सोलर लाइट लगते ही खराब हो जाती है, जबकि खराबी का आरोप मुखिया पर आता है, लेकिन लगाने का अधिकार उसके पास नहीं है। सदन में सोलर लाइट की खरीद और स्थापना का अधिकार मुखिया को देने तथा कीमत से अधिक दाम पर खरीदारी के आरोपों की भी चर्चा हुई।


कृषि और पशुपालन कार्य मनरेगा से कराने की मांग

अंत में कृषि और पशुपालन से जुड़े कार्यों को मनरेगा के जरिए कराने की मांग उठी। इस पर ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा कि यदि पशु शेड बनाना है या कृषि कार्य कराना है तो जीविका को जानकारी देनी होगी। जीविका की अनुशंसा से कृषि और पशुपालन से जुड़े सभी कार्य कराए जा सकते हैं। इस तरह प्रश्नकाल के दौरान विधान परिषद में सम्मान, पंचायत अधिकार, पारदर्शिता और ग्रामीण विकास से जुड़े कई मुद्दों पर विस्तृत चर्चा और बहस देखने को मिली।

वंदना की रिपोर्ट