सड़कों की बदहाली पर प्रशासन सख्त, प्रमंडलीय आयुक्त ने एजेंसियों को दिया 30 मई तक का समय

Bihar News : पटना प्रमंडल के आयुक्त ने सड़कों पर हो खुदाई और निर्माण के कारण खराब स्थिति को लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया है। आयुक्त ने मानसून से पहले सभी सड़कों की मरम्मत और गड्ढों को भरने का काम हर हाल में पूरा करने का निर्देश दिया है.....

सड़कों की बदहाली पर प्रशासन सख्त, प्रमंडलीय आयुक्त ने एजेंसि
पटना के सड़कों की बदहाली पर प्रशासन सख्त- फोटो : वंदना शर्मा

Patna : राजधानी पटना की सड़कों पर हो रही अंतहीन खुदाई और अधूरे निर्माण कार्यों को लेकर अब प्रशासनिक अमला पूरी तरह सख्त नजर आ रहा है। प्रमंडलीय आयुक्त ने विभिन्न निर्माण एजेंसियों के साथ समीक्षा बैठक कर उन्हें 30 मई तक का अंतिम अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने स्पष्ट लहजे में निर्देश दिया है कि मानसून से पहले सभी सड़कों की मरम्मत और गड्ढों को भरने का काम हर हाल में पूरा हो जाना चाहिए, अन्यथा संबंधित एजेंसियों और अधिकारियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


जनता की नाराजगी: कागजी आदेशों से ऊपर धरातल पर दिखे काम 

प्रशासन की इस सख्ती के बावजूद पटनावासियों में अविश्वास का माहौल बना हुआ है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन के ऐसे आदेश अक्सर 'आई वॉश' (दिखावा) साबित होते हैं और धरातल पर स्थिति जस की तस बनी रहती है। लोगों ने सरकार और प्रशासन से आग्रह किया है कि इस बार केवल चेतावनी न दी जाए, बल्कि यह सुनिश्चित किया जाए कि एजेंसियां काम को बीच में न छोड़ें।


स्कूली बच्चों और राहगीरों के लिए बनी मुसीबत 

सड़कों की खुदाई के कारण राजधानी की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, स्कूल के समय सड़कों की हालत सबसे अधिक कष्टदायक होती है, जिससे बच्चों को देरी होती है और दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। सड़कों को खोदकर लंबे समय तक खुला छोड़ दिए जाने से आए दिन लोग चोटिल हो रहे हैं। रात के समय कम रोशनी में ये अधूरे कार्य और गहरे गड्ढे राहगीरों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं।


आधा दिन कामआधा दिन बंद: लापरवाही का आलम 

निर्माण कार्य की कछुआ गति पर सवाल उठाते हुए नागरिकों ने बताया कि एजेंसियां अक्सर आधा दिन काम करती हैं और फिर हफ्तों के लिए काम बंद कर दिया जाता है। इस लापरवाही की वजह से शहर में जलजमाव और भीषण जाम की स्थिति बनी रहती है। मानसून के करीब आने के साथ ही लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं, क्योंकि अधूरी सड़कों के कारण बारिश के समय पूरी राजधानी में नरकीय स्थिति उत्पन्न होने का डर सता रहा है।


30 मई की डेडलाइन पर टिकी सबकी नजरें 

प्रशासन की इस नई डेडलाइन के बाद अब पटनावासियों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वास्तव में 15 दिनों के भीतर सड़कें दुरुस्त हो पाएंगी। प्रमंडलीय आयुक्त के अल्टीमेटम ने निर्माण एजेंसियों पर दबाव तो बनाया है, लेकिन चुनौती बड़े पैमाने पर फैली खुदाई को समय पर समेटने की है। अब देखना यह होगा कि राजधानी के लोगों को खराब सड़कों, धूल, जाम और जलजमाव की समस्या से कब तक वास्तविक राहत मिल पाती है।


वंदना की रिपोर्ट