Bankipur Assembly: सज गया बांकीपुर का सियासी रण ! किसी के पास अरबों की दौलत, कोई कर्ज से है आजाद, तो किसी पर लाखों का बोझ, हलफनामों ने खोल दिए प्रशांत किशोर से लेकर,नीरज कुमार वीना मानवी के चेहरे के कई राज, पढ़िए

Bankipur Assembly: पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर अब सियासी जंग पूरी तरह परवान चढ़ने को तैयार है। ...

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, हलफनामों ने खोल दिए प्रशांत किशोर से लेकर,नीरज कुमार वीना मानवी के दौलत के कई राज- फोटो : reporter

Bankipur Assembly: पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर अब सियासी जंग पूरी तरह परवान चढ़ने को तैयार है। तमाम सियासी दलों के उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल कर दिया है और अब नजर चुनावी मुहिम पर टिक गई है। सोमवार को जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर, भाजपा के उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा और जन शक्ति जनता दल की प्रत्याशी वीना मानवी ने अपना नामांकन दाखिल किया। इससे पहले राजद उम्मीदवार रेखा कुमारी गुप्ता भी चुनावी मैदान में उतर चुकी हैं। अब नामांकन की रस्म पूरी होने के बाद सियासी अखाड़े में बयानबाज़ी, जनसंपर्क और वोटों की जद्दोजहद तेज़ होगी।

इस बीच चुनावी हलफनामों ने उम्मीदवारों की माली हैसियत, कर्ज़, तालीमी सफर और आर्थिक तस्वीर को भी बेनकाब कर दिया है। सबसे ज़्यादा चर्चा जन सुराज के प्रशांत किशोर की संपत्ति को लेकर है। हलफनामे के मुताबिक प्रशांत किशोर और उनकी पत्नी डॉ. जाह्नवी दास के पास करीब 198.16 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति है। हालांकि उन पर एचडीएफसी बैंक का करीब 5.77 करोड़ रुपये का कर्ज़ भी दर्ज है। उनकी कंपनी वेधास वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड ने पिछले वित्तीय वर्ष में जन सुराज पार्टी को 85 करोड़ रुपये का चंदा भी दिया है।


दूसरी तरफ भाजपा के 32 वर्षीय उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा खुद को सादगी की मिसाल के तौर पर पेश करते दिख रहे हैं। उनके पास करीब 12.28 लाख रुपये की चल संपत्ति है, कोई मकान नहीं है और न ही किसी बैंक या सरकारी संस्था का कोई कर्ज़। उनके नाम सिर्फ पैतृक कृषि भूमि दर्ज है।

वहीं जन शक्ति जनता दल की प्रत्याशी वीना मानवी और उनके परिवार के पास करीब 1.68 करोड़ रुपये की संपत्ति है। उनके हलफनामे में पति के नाम कोई संपत्ति दर्ज नहीं है, जबकि खुद वीना पर 36.32 लाख रुपये का होम और इंश्योरेंस लोन बकाया है।

अब हलफनामों से निकले इन आंकड़ों ने सियासी फिज़ा को और गर्म कर दिया है। बांकीपुर की जंग अब सिर्फ नारों और वादों की नहीं, बल्कि भरोसे, साख और पारदर्शिता की भी इम्तिहान बन चुकी है।

रिपोर्ट- रंजीत कुमार