IGIMS: डिजिटल बिहार का हेल्थ मिशन, IGIMS में एआई की एंट्री, 1200 बेड के मेगा अस्पताल से बदलेगा इलाज का मिजाज

IGIMS: इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में अब मरीजों को डिजिटल हेल्थकेयर और एआई आधारित जांच-इलाज की सुविधा मिलने जा रही है। ...

AI at IGIMS 1200 Bed Mega Hospital to Transform Care
IGIMS में एआई की एंट्री- फोटो : Hiresh Kumar

IGIMS: बिहार की सियासत अब स्वास्थ्य के मैदान में नई इबारत लिखने की तैयारी में है। राजधानी स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में अब मरीजों को डिजिटल हेल्थकेयर और एआई आधारित जांच-इलाज की सुविधा मिलने जा रही है। दावा है कि इलाज होगा और भी सटीक, तेज और पारदर्शी।

सरकार डिजिटल बिहार, स्वस्थ बिहार के विज़न को जमीनी हकीकत में बदलने की कवायद में जुटी है। इसी कड़ी में IGIMS में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित हेल्थ सिस्टम लागू किया जा रहा है, जिससे रोग की पहचान, डेटा एनालिसिस और उपचार की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी। स्वास्थ्य महकमे का कहना है कि इससे गंभीर बीमारियों की शुरुआती पहचान आसान होगी और चिकित्सकीय त्रुटियों में कमी आएगी।

राजधानी के इस प्रमुख चिकित्सा संस्थान में 1200 बेड का अत्याधुनिक मल्टीस्पेशलिस्ट अस्पताल भी निर्माणाधीन है। उम्मीद जताई जा रही है कि दिसंबर तक यह सुविधा मरीजों के लिए बहाल हो जाएगी। नए अस्पताल में आधुनिक आईसीयू, इमरजेंसी वार्ड और सुपर-स्पेशलिटी सेवाएं उपलब्ध होंगी, जिससे मरीजों को उन्नत उपचार एक ही छत के नीचे मिल सकेगा।

फिलहाल IGIMS में 1500 से 1700 बेड की सुविधा उपलब्ध है। हाल ही में 500 बेड के नए अस्पताल भवन का उद्घाटन किया गया था, जिससे मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए दबाव कम हुआ है। अब 1200 बेड के इस मेगा प्रोजेक्ट के साथ संस्थान प्रदेश का सबसे बड़ा हेल्थ हब बनने की दिशा में अग्रसर है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान सीवान समेत कई जिलों में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों की समीक्षा की गई थी। लक्ष्य साफ है लोगों को बेहतर इलाज के लिए राजधानी का रुख न करना पड़े, बल्कि उनके जिले में ही उच्चस्तरीय चिकित्सा उपलब्ध हो। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में यह डिजिटल और इन्फ्रास्ट्रक्चर विस्तार केवल प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि सुशासन की सियासी रणनीति भी है। सवाल यह है कि एआई आधारित यह सिस्टम कितनी तेजी से धरातल पर असर दिखाता है। फिलहाल सरकार का संदेश स्पष्ट है बिहार की सेहत अब तकनीक के सहारे नई करवट लेने जा रही है।