Bihar Politics:नशा-पानी बहुत खराब हो गया है... अनंत सिंह ने उठाई शराबबंदी खत्म करने की मांग ,क्या फिर खुलेगी शराब की दुकानें?
Bihar Politics: अनंत सिंह ने साफ लफ्ज़ों में कहा कि बिहार में दारू चालू होना चाहिए, क्योंकि मौजूदा हालात में नशा-पानी बहुत खराब हो गया है।
Bihar Politics: बिहार की सियासत में सत्ता परिवर्तन के साथ ही अब एक नया मुद्दा ज़ोर पकड़ता नजर आ रहा है शराबबंदी कानून पर फिर से बहस। नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ते ही दारू पॉलिटिक्स ने सुर्खियां बटोरनी शुरू कर दी हैं। इसी कड़ी में मोकामा से जेडीयू विधायक अनंत सिंह का बयान सियासी हलकों में हलचल मचा रहा है।
अनंत सिंह ने साफ लफ्ज़ों में कहा कि बिहार में दारू चालू होना चाहिए, क्योंकि मौजूदा हालात में नशा-पानी बहुत खराब हो गया है। उनका इशारा इस तरफ था कि शराबबंदी के बावजूद अवैध नशे का कारोबार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर वे जल्द ही सम्राट चौधरी से बातचीत करेंगे, जो आज (15 अप्रैल 2026) मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं।
यह बयान ऐसे वक्त आया है जब सम्राट चौधरी को एनडीए विधायक दल का नेता चुना जा चुका है और वे बिहार की कमान संभालने के लिए तैयार हैं। अनंत सिंह ने उन्हें मुबारकबाद देते हुए कहा कि वे खूब काम करें, लेकिन साथ ही यह भी साफ कर दिया कि सरकार की असली ‘कमांड’ अब भी नीतीश कुमार के इशारों पर ही चलेगी। उनके शब्दों में मालिक वही रहेंगे… उन्हीं के इशारे पर काम होगा।
यह बयान कई मायनों में अहम है। एक तरफ जहां सम्राट चौधरी नए नेतृत्व का चेहरा बन रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ यह संकेत भी दिया जा रहा है कि सत्ता के असली सारथी अब भी नीतीश कुमार ही रहेंगे। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या नई सरकार शराबबंदी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर कोई बड़ा फैसला लेती है या फिर स्टेटस को बरकरार रखा जाता है।
उधर विपक्ष भी इस मुद्दे को हवा देने में पीछे नहीं है। तेजस्वी यादव ने पहले ही सम्राट चौधरी को लालू की पाठशाला का बताया था, जिस पर अनंत सिंह ने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि तेजस्वी के पास अब सिर्फ बोलने के अलावा कुछ नहीं बचा।
इस बीच उमेश सिंह कुशवाहा ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सम्राट चौधरी विकसित बिहार के संकल्प को आगे बढ़ाएंगे और नीतीश कुमार के सुशासन मॉडल को कायम रखेंगे। उन्होंने माना कि नीतीश जैसे नेता की कमी जरूर खलेगी, लेकिन उनकी विरासत आगे बढ़ेगी।बिहार की सियासत अब एक नए मोड़ पर खड़ी है जहां एक ओर सत्ता का नया चेहरा है, तो दूसरी ओर पुराने फैसलों पर उठते नए सवाल। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दारू पॉलिटिक्स आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति का नया केंद्र बनेगी?