Pappu Yadav: सियासत के अखाड़े में गिरफ्तारी का दांव, पप्पू यादव पर कानून का शिकंजा, IGIMS में गुजरी रात
पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की गिरफ्तारी ने सत्ता के गलियारों में सरगर्मी बढ़ा दी है।
Pappu Yadav: बिहार की राजनीति एक बार फिर सत्ता, आरोप और विरोध के भंवर में फंसती नजर आ रही है। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की गिरफ्तारी ने सत्ता के गलियारों में सरगर्मी बढ़ा दी है। बिहार पुलिस ने उन्हें 1995 के एक पुराने मामले में गिरफ्तार कर सियासी हलकों में भूचाल ला दिया है।
पटना सिटी के एसपी भानु प्रताप सिंह के मुताबिक यह मामला गर्दनीबाग थाना से जुड़ा है, जो पहले पुरानी भारतीय दंड संहिता के तहत दर्ज था और अब भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत चल रहा है। इस केस में धारा 419, 420, 468, 448, 506 और 120बी लगाई गई हैं। अदालत में सुनवाई जारी थी, लेकिन सांसद की लगातार गैरहाज़िरी के चलते कानून ने आखिरकार सख़्ती का रास्ता अख़्तियार किया।
एमपी-एमएलए अदालत ने पप्पू यादव समेत अन्य दो आरोपितों शैलेंद्र प्रसाद और चंद्र नारायण प्रसाद के खिलाफ पहले ही कुर्की-जब्ती का हुक्म सुना दिया था। गिरफ्तारी वारंट और इश्तेहार के बाद भी पेशी न होने पर अदालत ने साफ संदेश दे दिया कानून से ऊपर कोई नहीं।
शुक्रवार रात पटना के मंदिरी स्थित आवास पर सियासत और कानून आमने-सामने आ गए। सिटी एसपी, पांच डीएसपी, छह थानेदार और करीब 100 पुलिसकर्मियों की मौजूदगी ने पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया। ऊपर के फ्लोर पर मौजूद पप्पू यादव पुलिस को देखकर भौचक रह गए। तीखी नोक-झोंक हुई, समर्थकों की भीड़ जुटने लगी और माहौल तनावपूर्ण हो गया।
पुलिस के “कोर्ट का ऑर्डर है, चलना होगा” कहने पर पप्पू यादव ने साफ कहा कि वे रात में नहीं जाएंगे। उन्होंने इसे राजनीतिक साज़िश करार दिया और कहा कि वे जिस लड़ाई को उठा रहे हैं, उसका नतीजा यही होना था।
रात करीब 12:30 बजे IGIMS में मेडिकल जांच के बाद उन्हें पुलिस हिरासत में रखा गया। इस बीच पप्पू यादव ने फेसबुक पर तीखा हमला बोलते हुए लिखा कि NEET छात्रा और हॉस्टल कांड में आवाज़ उठाने की सज़ा उन्हें दी जा रही है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष और गृह मंत्री से भी इंसाफ़ की गुहार लगाई।
अब सवाल यह है क्या यह सिर्फ कानूनी कार्रवाई है या फिर सत्ता बनाम सवाल उठाने वाले नेता की टकराहट? जवाब आने वाले दिनों में मिलेगा, लेकिन इतना तय है कि बिहार की राजनीति में यह गिरफ्तारी लंबी सियासी बहस को जन्म दे चुकी है।