140 साल की उम्र में चुनौतीपूर्ण मोड़ पर कांग्रेस, आखिर जनता से दूर क्यों हो गई देश की सबसे पुरानी पार्टी, पढ़िए...

Bihar Congress: कांग्रेस अपने 140 साल के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। ...

Congress Faces Crisis
140 साल की उम्र में चुनौतीपूर्ण मोड़ पर कांग्रेस- फोटो : social Media

Bihar Congress: देश के सबसे पुराने राजनीतिक दल कांग्रेस फिलहाल इतिहास के शायद सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। चुनाव दर चुनाव उसका प्रभावक्षेत्र सिकुड़ता जा रहा है और बिहार  और दिल्ली विधानसभा चुनावों में करारी हार ने पार्टी की स्थिति को और जटिल बना दिया है। पार्टी ने वोट चोरी को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने का प्रयास किया, लेकिन न तो उसके परंपरागत वोट लौटे और न ही इंडिया गठबंधन के अन्य दलों का समर्थन मिला।

आने वाला साल और भी चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि असम, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे समय में 140वें स्थापना दिवस पर कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व आत्मविश्वास से भरे भाषण देता नजर आया। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कांग्रेस को भारत की आत्मा की आवाज करार दिया, जबकि राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे विचारधारा का नाम बताया। लेकिन असलियत यह है कि पार्टी संगठन संकट में है और अंदरूनी असंतोष साफ़ सुनाई दे रहा है।

 हालिया घटनाक्रम इस असंतोष को उजागर करते हैं। वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने भाजपा और आरएसएस की संगठनात्मक शक्ति की प्रशंसा कर पार्टी में हलचल पैदा कर दी। उन्होंने जमीनी स्तर पर कांग्रेस संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पार्टी का पुनर्निर्माण और संगठनात्मक सुधार अब अनिवार्य हो गया है। शशि थरूर का संयमित समर्थन भी दिखाता है कि वरिष्ठ नेतृत्व में विचारों का खुला विमर्श जारी है, लेकिन एकरूपता की कमी पार्टी के लिए चुनौती बनती जा रही है।

इतिहास, मूल्य और विचारधारा कांग्रेस की मूल पूंजी मानी जाती रही है, लेकिन इसे चुनावी लाभ में बदलने की क्षमता अब संगठन, सुधार और जनता से प्रभावी संपर्क पर निर्भर करती है। भाजपा के एकछत्र वर्चस्व और कांग्रेस को चापलूसों की सेना और सबसे कमजोर कड़ी कहे जाने जैसी आलोचनाओं ने पार्टी को आत्ममंथन और बदलाव की ओर प्रेरित किया है।

कांग्रेस अपने 140 साल के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। अगर पार्टी अतीत की विफलताओं से सबक लेकर संगठनात्मक मजबूती और जनता से नये ढंग से जुड़ाव कायम करती है, तो यह विपक्ष के रूप में भाजपा का मुकाबला करने की क्षमता फिर से हासिल कर सकती है। नए साल में कांग्रेस की रणनीति और तेवर यह तय करेंगे कि क्या यह पुनरुत्थान संभव है या नहीं।