एटीएस कोर्ट पटना का बड़ा फैसला, देश के खिलाफ नेटवर्क चलाने वाले 6 आरोपी दोषी करार, हैरान करने वाला मामला
जाली नोटों से जुड़ा यह मामला 10 जनवरी 2016 का है, जब एटीएस को गुप्त सूचना मिली थी कि बिहार में बड़े पैमाने पर जाली नोट खपाने की तैयारी चल रही है। इसमें छह लोगों को गिरफ्तार किया गया था.
ATS Court Bihar : भारतीय मुद्रा को कमजोर करने और देश में फर्जी तरीके से जाली मुद्रा का नेटवर्क स्थापित कर भारत विरोधी तत्वों में शामिल छह लोगों को एटीएस की विशेष अदालत ने दोषी ठहराया है। यह मामला जाली नोटों के अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े आरोपियों को दोषी ठहराए जाने से है। आतंकवाद विरोधी दस्ता यानी एटीएस की विशेष अदालत ने 27 मई को इस सनसनीखेज मामले में छह आरोपितों को दोषी करार दिया। एटीएस के विशेष न्यायाधीश विपिन कुमार की कोर्ट ने सभी आरोपितों को भारतीय दंड संहिता की धारा 489-बी, 489-सी और यूएपीए की धारा 16 के तहत दोषी माना है। अब इस मामले में सजा का ऐलान 3 जून को किया जाएगा।
दोषी ठहराए गए आरोपितों में जहीर अब्बास, अरविंद पासवान, केदार पासवान, उदय कुमार, संतु कुमार और अजय कुमार शामिल हैं। कोर्ट ने फैसला सुनाते ही सभी के बंधपत्र रद्द कर दिए और उन्हें न्यायिक हिरासत में बेउर जेल भेज दिया।
जाली नोटों से जुड़ा यह मामला 10 जनवरी 2016 का है, जब एटीएस को गुप्त सूचना मिली थी कि बिहार में बड़े पैमाने पर जाली नोट खपाने की तैयारी चल रही है। सूचना मिलते ही एटीएस की टीम ने गया जिले के हंटरगंज-डोभी इलाके में ताबड़तोड़ छापेमारी की। तलाशी के दौरान आरोपितों के पास से 500-500 रुपये के करीब साढ़े पांच लाख रुपये के जाली नोट बरामद किए गए थे।
जांच में खुलासा हुआ कि जाली भारतीय मुद्रा पश्चिम बंगाल के मालदा जिले से बिहार लाई जा रही थी। इसके बाद इन्हें राज्य के अलग-अलग जिलों में खपाने की साजिश रची गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 10 गवाह पेश किए गए, जिनके बयान और सबूतों के आधार पर अदालत ने सभी आरोपितों को दोषी माना।
अनिल की रिपोर्ट