Bankipur Assembly Seat: बांकीपुर का सियासी चक्रव्यूह, किंगमेकर पीके की राह में राजद की बिसात, क्या पहली जंग में ही मात होगी ब्रांड प्रशांत की? प्रशांत किशोर के माथे पर त्रिपुंड का क्या है अर्थ, पढ़िए

Bankipur Assembly Seat: सत्ता के गलियारों में किंगमेकर की हैसियत रखने वाले पीके अब बिहार में किंग बनने की जद्दोजहद में हैं। ...

Tripund on Prashant Kishor forehead
प्रशांत किशोर के माथे पर त्रिपुंड- फोटो : social Media

Bankipur Assembly Seat:   बरसों से दूसरों के लिए चुनावी बिसात बिछाने वाले प्रशांत किशोर उर्फ पीके अब खुद उसी बिसात पर सबसे कठिन इम्तिहान से गुजर रहे हैं।  सत्ता के गलियारों में किंगमेकर की हैसियत रखने वाले पीके अब बिहार में किंग बनने की जद्दोजहद में हैं। लेकिन पटना की प्रतिष्ठित बांकीपुर विधानसभा सीट उनके लिए किसी राजनीतिक चक्रव्यूह से कम नहीं दिख रही। जिस तरह महाभारत में अभिमन्यु को चारों तरफ से घेरकर रोकने की रणनीति बनाई गई थी, उसी अंदाज़ में अब पीके की सियासी राह में भी कई मोर्चे खुलते दिखाई दे रहे हैं।

बांकीपुर से जन सुराज की उम्मीदवारी का एलान होते ही यह चर्चा तेज थी कि कांग्रेस और राजद पर्दे के पीछे उन्हें समर्थन दे सकते हैं। माना जा रहा था कि भाजपा को चुनौती देने के लिए विपक्ष एक साझा रणनीति पर काम करेगा। मगर सियासत में अक्सर जो दिखाई देता है, वही पूरी हकीकत नहीं होता। अचानक राष्ट्रीय जनता दल ने अपने पत्ते खोलते हुए रेखा गुप्ता को मैदान में उतार दिया। इस एक फैसले ने विपक्षी एकजुटता के तमाम कयासों पर पानी फेर दिया और पीके की पहली चुनावी लड़ाई को कहीं ज्यादा पेचीदा बना दिया।

दिलचस्प बात यह भी है कि प्रशांत किशोर ने अपनी चुनावी रणनीति में खुद को नए अंदाज़ में पेश करना शुरू किया है। अक्टूबर 2025 में प्रचार के दौरान माथे पर लगाया गया तिलक कैमरे के सामने पोंछ देने को लेकर उनकी आलोचना हुई थी। अब लगभग 17 महीने बाद वही पीके पटना के प्राचीन महावीर मंदिर पहुंचे, विधिवत पूजा-अर्चना की, माथे पर त्रिपुंड लगाया और प्रसाद लेकर मंदिर परिसर का भ्रमण किया। सियासी जानकार इसे केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि बदली हुई चुनावी रणनीति के तौर पर भी देख रहे हैं, जिसमें प्रतीकों के जरिए एक व्यापक संदेश देने की कोशिश दिखाई देती है।

लेकिन बांकीपुर की जमीन आसान नहीं है। वर्ष 1995 से यह सीट भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ रही है। यहां कायस्थ, भूमिहार, ब्राह्मण, राजपूत और वैश्य मतदाताओं की बड़ी तादाद भाजपा के परंपरागत वोट बैंक के रूप में मानी जाती है। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को 63 प्रतिशत से अधिक वोट मिले थे, जबकि जन सुराज को महज पांच प्रतिशत के आसपास समर्थन मिला था। ऐसे में इस बार मुकाबला केवल भाजपा बनाम जन सुराज नहीं, बल्कि ‘मोदी ब्रांड’ और ‘प्रशांत किशोर ब्रांड’ की सीधी टक्कर के रूप में भी देखा जा रहा है।

पीके रोजगार, शिक्षा, बेहतर प्रशासन और व्यवस्था परिवर्तन जैसे मुद्दों के सहारे शहरी युवाओं, पेशेवर वर्ग और न्यूट्रल वोटरों को अपनी तरफ खींचने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन इसी बीच राजद के मैदान में उतरने से चुनावी गणित पूरी तरह बदल गया है। बांकीपुर में राजद का पारंपरिक मुस्लिम-यादव आधार मौजूद है। यदि विपक्षी वोट तीन हिस्सों में बंटते हैं तो इसका सबसे बड़ा फायदा भाजपा को मिल सकता है। यही वजह है कि राजनीतिक गलियारों में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि राजद का मकसद भाजपा को चुनौती देना है या विपक्ष के भीतर उभर रहे एक नए चेहरे की रफ्तार पर लगाम लगाना।

सियासत के जानकारों का मानना है कि अगर प्रशांत किशोर पहली ही बार में इस हाई-प्रोफाइल सीट से जीत दर्ज कर लेते, तो बिहार की विपक्षी राजनीति में उनका कद तेजी से बढ़ता। विधानसभा पहुंचने के बाद वे खुद को राज्य में एक बड़े वैकल्पिक नेतृत्व के तौर पर स्थापित करने का दावा और मजबूती से कर सकते थे। ऐसे में उनका उभार भविष्य की राजनीति में तेजस्वी यादव के लिए भी नई चुनौती बन सकता था। इसी वजह से राजद का यह दांव केवल चुनावी नहीं, बल्कि दूरगामी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है।

अब बांकीपुर की लड़ाई केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं रह गई है। यह भाजपा की परंपरागत पकड़, राजद की राजनीतिक रणनीति और जन सुराज के भविष्य—तीनों की साख का सवाल बन चुकी है। यदि विपक्षी वोटों का बिखराव होता है तो भाजपा की राह आसान हो सकती है। वहीं अगर प्रशांत किशोर अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाते, तो बिहार की राजनीति में खुद को नए विकल्प के रूप में स्थापित करने वाले उनके नैरेटिव को बड़ा झटका लग सकता है। दूसरी ओर, यदि वे इस कठिन मुकाबले में मजबूत चुनौती देने में सफल रहते हैं, तो यह बिहार की सियासत में एक नए अध्याय की शुरुआत भी साबित हो सकती है। फिलहाल बांकीपुर की जंग ने पूरे प्रदेश की राजनीति को गर्मा दिया है और अब सभी निगाहें इस दिलचस्प मुकाबले पर टिकी हैं।