बांकीपुर उपचुनाव आज, 30 साल पुराने भाजपा के गढ़ में प्रशांत किशोर की अग्निपरीक्षा, राजद के अस्तित्व की चुनौती, वोटिंग के पहले कौन भारी
बांकीपुर विधानसभा सीट पर आज (30 जुलाई) उपचुनाव के लिए मतदान हो रहा है। सुबह 8 बजे से शुरू हुआ मतदान शाम 6 बजे तक चलेगा। इस चुनाव में 25 उम्मीदवार मैदान में हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला भाजपा, राजद और जन सुराज के बीच माना जा रहा है।
Bankipur Bypoll today : राजधानी पटना की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव केवल एक सीट का चुनाव नहीं रह गया है। यह चुनाव तीन प्रमुख राजनीतिक दलों और उनके नेताओं के लिए प्रतिष्ठा और भविष्य की परीक्षा बन गया है। एक ओर जहां भाजपा अपने तीन दशक पुराने गढ़ को बचाने की चुनौती से जूझ रही है, वहीं जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर के लिए यह चुनाव उनकी राजनीतिक स्वीकार्यता की सबसे बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। दूसरी ओर राजद के सामने अपने पारंपरिक मुस्लिम-यादव (MY) वोट बैंक को एकजुट बनाए रखने और कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने की चुनौती है।
बांकीपुर विधानसभा सीट पर आज (30 जुलाई) उपचुनाव के लिए मतदान हो रहा है। सुबह 8 बजे से शुरू हुआ मतदान शाम 6 बजे तक चलेगा। इस चुनाव में 25 उम्मीदवार मैदान में हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला भाजपा, राजद और जन सुराज के बीच माना जा रहा है। करीब 3.79 लाख मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर अगले विधायक का चुनाव करेंगे। जिला निर्वाचन कार्यालय के अनुसार, मतदान के लिए कुल 422 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए केंद्रीय अर्द्धसैनिक बल (CAPF) की 14 कंपनियां तैनात की गई हैं। इसके अलावा 9 फ्लाइंग स्क्वॉड, 18 स्टैटिक सर्विलांस टीम, 6 वीडियो सर्विलांस टीम, 3 वीडियो व्यूइंग टीम और 42 सेक्टर पदाधिकारी पूरे क्षेत्र में निगरानी रख रहे हैं।
भाजपा के गढ़ को बचाने की चुनौती
बांकीपुर विधानसभा सीट पर 1995 से लगातार भाजपा का कब्जा रहा है। पिछले तीन दशकों में यह सीट भाजपा की सबसे सुरक्षित शहरी सीटों में गिनी जाती रही है। यही कारण है कि इस बार भी भाजपा के लिए यह उपचुनाव केवल जीत का सवाल नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक साख बचाने की लड़ाई बन गया है। यदि पार्टी इस सीट पर बढ़त कायम रखती है तो यह मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार के लिए भी बड़ा राजनीतिक संदेश होगा। वहीं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को अपने 'घर' में अपनी पकड़ साबित करनी है।
प्रशांत किशोर के लिए सबसे बड़ी परीक्षा
इस उपचुनाव को जन सुराज और उसके संस्थापक प्रशांत किशोर के लिए सबसे अहम चुनाव माना जा रहा है। बिहार में नई राजनीतिक ताकत के रूप में खुद को स्थापित करने का दावा करने वाले प्रशांत किशोर के लिए बांकीपुर का परिणाम उनकी रणनीति और जनाधार की पहली बड़ी कसौटी होगा। यदि जन सुराज इस सीट पर मजबूत प्रदर्शन करता है या मुकाबले को त्रिकोणीय बनाता है, तो बिहार की राजनीति में उसकी भूमिका और मजबूत हो सकती है। वहीं अपेक्षा से कमजोर प्रदर्शन होने पर विपक्ष उनके राजनीतिक प्रभाव पर सवाल खड़े कर सकता है।
राजद के सामने वोट बैंक बचाने की चुनौती
राजद के लिए भी यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है। पार्टी की कोशिश अपने मुस्लिम-यादव (MY) वोट बैंक को एकजुट रखने की है। शहरी सीट होने के कारण राजद को परंपरागत रूप से यहां संघर्ष करना पड़ा है, लेकिन यदि उसके वोटों में सेंध लगती है तो इसका असर आने वाले विधानसभा चुनाव की रणनीति पर भी पड़ सकता है। ऐसे में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के लिए यह चुनाव पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने और यह संदेश देने का अवसर है कि राजद शहरी क्षेत्रों में भी अपनी पकड़ मजबूत कर सकता है।
नतीजों पर पूरे बिहार की नजर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांकीपुर का नतीजा सिर्फ एक विधायक का चुनाव नहीं तय करेगा, बल्कि यह भी बताएगा कि भाजपा का शहरी जनाधार कितना मजबूत है, जन सुराज को जनता कितना स्वीकार कर रही है और राजद अपने पारंपरिक वोट बैंक को किस हद तक बचाने में सफल रहती है। इसलिए इस उपचुनाव के परिणाम पर पूरे बिहार की राजनीतिक निगाहें टिकी हुई हैं। ऐसे में आज के मतदान के बाद 3 अगस्त के चुनाव परिणाम पर सबकी नजर होगी जो बिहार के सियासी भविष्य के लिए बेहद अहम होगा।