Bank Strike: चार दिन बंद रहेंगे बैंक, जल्दी जल्दी निपटा लें अपना काम, बैंककर्मियों जाएंगें इस दिन से देशव्यापी हड़ताल पर

पाँच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की मांग को लेकर देशभर के सरकारी, निजी, ग्रामीण और सहकारी बैंकों में एक दिवसीय हड़ताल का ऐलान किया गया है।

Banks to Remain Closed for 4 Days as Staff Strike
ककर्मियों जाएंगें देशव्यापी हड़ताल पर - फोटो : X

Bank Strike: देश की बैंकिंग सियासत एक बार फिर उबाल पर है। पाँच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की मांग को लेकर 27 जनवरी को देशभर के सरकारी, निजी, ग्रामीण और सहकारी बैंकों में एक दिवसीय हड़ताल का ऐलान किया गया है। इस हड़ताल का आह्वान यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने किया है, जिसमें बैंक कर्मियों के लगभग सभी प्रमुख संगठन शामिल हैं। हड़ताल का असर देशव्यापी होगा और इससे करोड़ों खाताधारकों की मुश्किलें बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (आईबोक) के राष्ट्रीय सचिव डीएन त्रिवेदी ने बताया कि बैंक कर्मियों की यह लड़ाई सिर्फ पाँच दिन के सप्ताह तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आईडीबीआई बैंक, ग्रामीण बैंकों और एलआईसी के विनिवेश पर रोक, नियमित कार्यालय समय लागू करने और पेंशन के अद्यतन जैसे अहम मुद्दे भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार इन मांगों को नजरअंदाज कर रही है, जिससे कर्मचारियों में गहरी नाराजगी है।

पाँच दिवसीय कार्यसप्ताह की मांग को लेकर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया गया। इस दौरान बैंक यूनियनों के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बैंक के कर्मचारियों ने सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला। वक्ताओं ने कहा कि बैंक कर्मी भी इंसान हैं और उन्हें भी संतुलित कार्यजीवन का हक मिलना चाहिए।

यूनियन नेताओं का तर्क है कि केंद्र और राज्य सरकार के कार्यालयों, रिजर्व बैंक, नाबार्ड, बीमा कंपनियों, सेबी और आयकर विभाग में पहले से ही पाँच दिवसीय सप्ताह लागू है। इसके बावजूद बैंकों में यह व्यवस्था अब तक लागू नहीं की गई है, जबकि इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और एटीएम जैसी सुविधाओं के चलते कामकाज पहले से कहीं अधिक डिजिटल हो चुका है।

हड़ताल के चलते 24 से 27 जनवरी तक कुल चार दिनों तक बैंक शाखाओं में ग्राहकों को कोई सेवा नहीं मिल सकेगी। इस आंदोलन में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से लेकर सहायक महाप्रबंधक तक शामिल होंगे। यूनियनों ने सरकार से अपील की है कि वह टकराव की बजाय संवाद का रास्ता अपनाए और बैंक कर्मियों की जायज मांगों पर शीघ्र फैसला ले, ताकि बैंकिंग व्यवस्था और आम जनता को राहत मिल सके।