Patna High Court: पटना हाईकोर्ट में न्याय बनाम नाराजगी, जज-वकील टकराव से ठप होगा काम, बार एसोसिएशन ने किया न्यायिक बहिष्कार का ऐलान
Patna High Court: बिहार की न्यायिक राजधानी पटना हाईकोर्ट में जजों और वकीलों के बीच बढ़ता तनाव अब खुली टकराव की स्थिति में पहुंच गया है।
Patna High Court: बिहार की न्यायिक राजधानी पटना हाईकोर्ट में जजों और वकीलों के बीच बढ़ता तनाव अब खुली टकराव की स्थिति में पहुंच गया है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि बार एसोसिएशन ने न्यायिक कार्य बहिष्कार का ऐलान कर दिया है। इसके तहत सोमवार 11 मई को हाईकोर्ट के वकील किसी भी अदालत में पेश नहीं होंगे।
तीनों अधिवक्ता संघों की समन्वय समिति की आपात बैठक में यह बड़ा फैसला लिया गया। बैठक में स्पष्ट कहा गया कि कोर्ट परिसर में वकीलों के साथ कथित अपमानजनक व्यवहार और हाल ही में जारी किए गए वाहन प्रतिबंध आदेश के खिलाफ यह कदम उठाया गया है।
समिति के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा ने बताया कि लंबे समय से कोर्ट परिसर में पार्किंग और प्रवेश व्यवस्था को लेकर अधिवक्ताओं में असंतोष था। उनका कहना है कि कई जजों का व्यवहार सुनवाई के दौरान अभद्र, अपमानजनक और गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला रहता है, जिससे वकीलों में गहरी नाराजगी है।
बैठक में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ जज स्वयं को कानून का सर्वोच्च ज्ञाता मानते हैं और युवा ही नहीं, वरिष्ठ वकील भी उनके सामने पेश होने से असहज महसूस करते हैं। इस वजह से न्यायिक वातावरण में तनाव बढ़ता जा रहा है। इस आंदोलन में एडवोकेट्स एसोसिएशन, लॉयर्स एसोसिएशन और बार एसोसिएशन के प्रमुख पदाधिकारी शामिल रहे, जिनमें संजय सिंह और मुकेश कांत जैसे वरिष्ठ वकील भी मौजूद थे।
विवाद की एक बड़ी वजह हाल ही में हाईकोर्ट प्रशासन द्वारा जारी किया गया वह आदेश है, जिसमें बैरिकेडिंग के बाद परिसर के अंदर गाड़ियों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। वकीलों का कहना है कि इससे बुजुर्ग, महिला और दिव्यांग अधिवक्ताओं को भारी परेशानी हो रही है। बैटरी चालित वाहनों की व्यवस्था को भी उन्होंने नाकाफी बताया है।
अधिवक्ताओं का तर्क है कि गेट पर रोक के कारण उन्हें लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ती है, जो असुविधाजनक और व्यवहारिक रूप से कठिन है। इसी वजह से वकीलों में रोष बढ़ता गया और मामला बहिष्कार तक पहुंच गया। बार एसोसिएशन ने साफ कहा है कि यह विरोध न्याय व्यवस्था के खिलाफ नहीं बल्कि सम्मान, सुविधा और गरिमा की मांग को लेकर है। वहीं दूसरी ओर प्रशासन की ओर से अभी तक इस विवाद पर कोई आधिकारिक समाधान सामने नहीं आया है, जिससे आने वाले दिनों में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।